बुढ़ापे में रचना का सहारा

Budhape me rachna ka sahara:

hindi sex story, antarvasna मेरी उम्र 60 वर्ष के ऊपर हो चुकी है और मैं अब घर पर ही रहता हूं मैंने कुछ वर्ष पहले ही अपनी नौकरी से रिटायरमेंट ले ली थी क्योंकि मेरे पैर में काफी दर्द रहता है जिस वजह से मुझे चलने फिरने में दिक्कत होती है इसलिए मैंने सोचा कि अब मुझे रिटायरमेंट ले लेनी चाहिए, मैंने अपनी नौकरी से रिटायरमेंट ले लिया और मैं अब घर पर ही रहता। मैं अपने परिवार के साथ अब ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहता हूं इतने वर्ष मैंने अपनी नौकरी में ही निकाल दिए लेकिन मैं अपने बच्चों के साथ कभी भी समय नहीं बिता पाया मुझे पता ही नहीं चला कि कब सब कुछ इतनी तेजी से निकलता चला गया मेरी पोती भी अब बड़ी हो चुकी है और उसकी 12वीं की परीक्षा पूरी हो चुकी है अब वह किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला लेना चाहती है।

एक दिन वह मेरे पास आई और कहने लगी दादा जी मुझे किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला लेना है मैंने काजल से कहा हां बेटा क्यों नहीं तुम्हें जहां मन हो तुम वहां पर दाखिला ले सकती हो, मैंने उससे पूछा तुम्हें क्या करना है तो वह कहने लगी कि मुझे एयरहोस्टेस बनना है उसके लिए मुझे दिल्ली जाना पड़ेगा लेकिन पापा मेरी बात नहीं मान रहे आप ही पापा से एक बार बात कीजिए, मैं काजल से बहुत ज्यादा प्यार करता हूं और वह हमारे घर में बड़ी लड़की है इसलिए मैंने उसे कहा ठीक है बेटा मैं तुम्हारे पापा से बात करता हूं। शाम को जब विजय काम से लौटा तो मैंने उससे बात की और कहा की काजल मुझसे आज कह रही थी कि उसे एयरहोस्टेस बनना है और वह दिल्ली जाना चाहती है तो विजय मुझे कहने लगा पिता जी आपको तो पता ही है कि आजकल का जमाना कितना खराब है मैं भला काजल को अकेले कैसे दिल्ली भेज सकता हूं मैंने विजय से कहा देखो बेटा अब समय बदल चुका है और वह जो चाहती है उसे तुम करने दो वह अब अपना ख्याल खुद रह सकती है जब तक तुम उसे पूरी तरीके से आजादी नहीं दोगे तो वह अपना ध्यान कैसे रखेगी और आगे कैसे बढ़ेगी।

विजय मेरी बात मानने को तैयार नहीं था लेकिन मैंने उसे मना लिया क्योंकि वह शायद मेरी बात को भी मना ना कर सका मैंने उसे कहा कि बेटा हम उसे किसी अच्छे हॉस्टल में रख देंगे ताकि वह आराम से वहां रह सके और अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सके बाकी बीच-बीच में मैं भी उससे मिलने चला जाया करूंगा और वैसे भी तुम्हारी बहन तो दिल्ली में है ही, विजय मेरी बात मान चुका था और काजल ने भी अब दाखिला ले लिया काजल बहुत खुश हो गई और जब मैं उसे दिल्ली छोड़ने के लिए गया तो वह मुझे कहने लगी दादा जी यह सब आपकी वजह से ही हो पाया है यदि आप पापा को नहीं समझाते तो शायद वह मेरी बात कभी नहीं समझते। मैं कुछ दिनों तक दिल्ली में अपनी लड़की के घर पर रहा और काजल भी मेरे साथ थी मैं काजल को उस वक्त ही कह दिया था कि यदि तुम्हें कोई दिक्कत हो तो तुम अपनी बुआ जी से कह देना, मैं कुछ दिनों तक ही दिल्ली रुख पाया और उसके बाद काजल भी अपने हॉस्टल में चली गई मैं वापस अपने शहर कानपुर लौट आया मैं जैसे ही कानपुर पहुंचा तो मैंने काजल को फोन किया और पूछा बेटा सब कुछ ठीक तो है वह कहने लगी हां दादा जी आप आआज ही तो यहां से गए हैं और अभी से मेरी इतनी ज्यादा चिंता करने लगे हैं, काजल कहने लगी आप मेरी चिंता ना कीजिए यहां पर मैंने अब अपनी एक सहेली बना ली है और वह भी  कानपुर में रह चुकी है लेकिन अब वह रोहतक में रहती है मैंने काजल से पूछा तुम्हारी सहेली का क्या नाम है तो वह कहने लगी मेरी सहेली का नाम रचना है मैंने काजल से कहा बेटा तुम अपना ध्यान रखना और यदि कोई भी परेशानी हो तो तुम मुझे फोन कर देना और वैसे भी तुम्हारी बुआ जी दिल्ली में ही है, मैंने फोन रख दिया विजय भी उस वक्त ऑफिस से नहीं आया था जब विजय शाम को ऑफिस से लौटा तो वह मुझे कहने लगा पिताजी आज काजल का फोन मुझे आया था और वह कह रही थी कि हॉस्टल में सब कुछ बहुत ही अच्छा है मैंने विजय से कहा बेटा तुम चिंता मत करो मेरी भी काजल से बात हो चुकी है और मैं भी उसको हॉस्टल देख कर आया था सब कुछ ठीक है, विजय को भी चिंता लगी थी।

मेरे पैर का दर्द भी कुछ दिनों बाद कुछ ज्यादा ही होने लगा और मुझे बहुत तकलीफ होने लगी मुझे लगा कि कहीं मेरे पैर का ऑपरेशन कराने की नौबत ना आ जाए इसलिए मैं डॉक्टर के पास चला गया जब मैंने डॉक्टर को अपनी तकलीफ के बारे में बताया तो डॉक्टर ने मुझे कुछ दवाई दी लेकिन उस दवाई से मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था और कुछ समय बाद ही मेरे पैर का ऑपरेशन करवाना पड़ा, जब मेरे पैर का ऑपरेशन हुआ तो डॉक्टर ने मुझे काफी समय रेस्ट करने के लिए कह दिया था इसलिए मैं घर से ज्यादा बहार नही जाया करता था। काजल भी एक बार मुझे देखने के लिए आई थी लेकिन वह भी ज्यादा दिनों के लिए नहीं आ सकती थी मैं घर पर ही ज्यादा समय रहता था क्योंकि मुझे चलने में बहुत दिक्कत होती थी धीरे-धीरे मैं थोड़ा बहुत चलने लगा और सुबह के वक्त मैं टहलने के लिए अपने घर के पास पार्क में चले जाया करता अब मैं थोड़ा बहुत ठीक होने लगा था और जब मैं पूरी तरीके से ठीक हो गया तो मेरे पैर में अब ज्यादा दर्द नहीं होता।

एक दिन मुझे काजल का फोन आया और वह कहने लगी दादा जी अब आप कैसे हैं मैंने काजल से कहा बेटा मैं तो अब पूरी तरीके से ठीक हूं वह कहने लगी मुझे भी आपकी बहुत चिंता सताती है आप अपना ध्यान तो रखते हैं मैंने काजल से कहा हां बेटा मैं अपना ध्यान रखता हूं तुम्हें मेरी चिंता करने की जरूरत नहीं है और वैसे भी घर में सब लोग मौजूद हैं काजल मुझे कहने लगी कि दादाजी मैं कुछ दिनों बाद घर आ रही हूं और मेरे साथ मेरी सहेली रचना भी आ रही है मैंने काजल से कहा हां बेटा अब तुम आ जाओ मैं पूरी तरीके से फिट हो चुका हूं और कुछ समय बाद ही काजल अपनी सहेली रचना के साथ घर पर आ गई, जब मैंने काजल को देखा तो मैंने काजल को गले लगा लिया और उससे मैंने पूछा बेटा सब कुछ ठीक तो है वह कहने लगी हां दादा जी सब कुछ ठीक है। वह कहने लगी आओ मैं आपको अपनी सहेली से मिलवाती हूं, उसने मुझे रचना से मिलवाया मैंने रचना और काजल से कहा कि बेटा कब तुम लोग फ्रेश हो जाओ तुम दोनों बहुत थक गए होंगे। वह दोनों फ्रेश होने के लिए चले गए और मैं अपने हॉल में बैठकर अखबार पढ़ रहा था जब काजल मेरे पास आकर बैठी तो काजल कहने लगी दादा जी अब आपका पैर का दर्द कैसा है? मैंने उसे कहा बेटा अब तो ठीक है और पहले से काफी ज्यादा आराम है अब मैं सुबह टहलने के लिए भी जाया करता हूं वह कहने लगी हां जी आपने ठीक किया जो सुबह के वक्त आप टहलने चले जाते हैं ऐसे आपके पैर का दर्द थोड़ा बहुत कम हो जाया करेगा, मैंने उसे कहा अब तो मेरा दर्द पूरी तरीके से गायब हो चुका है इतना ज्यादा मुझे अब पहले की तरह दर्द होता नहीं है। रचना भी वहीं बैठी हुई थी मैंने रचना से पूछा बेटा आपके घर में कौन-कौन है तो वह कहने लगी दादा जी मेरे घर में पापा मम्मी और मेरे बड़े भैया हैं हम लोग भी पहले कानपुर में ही रहते थे, वह कहने लगी कि मेरे पिताजी कानपुर में बैंक में जॉब करते थे उस वक्त हम लोग भी कानपुर में ही रहा करते थे। हम तीनों साथ में बैठ कर बात कर रहे थे।

मुझे रचना की नीयत कुछ ठीक नहीं लगी, उसे देखकर मुझे ऐसा लगा शायद वह कुछ अजीब किस्म की है उसकी नजरों से साफ तौर पर झलक रहा था, उसने जिस प्रकार के कपड़े पहने थे वैसे कपड़े तो आज तक मैंने कभी भी काजल को नहीं पहनने दिए और ना ही उसने हमारे सामने ऐसे कपड़े पहने। मैं अपनी जगह बिल्कुल ही सही था जब मैं अपने कमरे मे आराम कर रहा था तभी मेरे पीछे से किसी का हाथ आया और मुझे ऐसा लगा कि शायद कोई मुझे पकड़ने की कोशिश कर रहा है। मैंने जब पीछे पलट कर देखा तो मेरे बिल्कुल पीछे रचना लेटी हुई थी मैंने उसे बोला तुम यह क्या कर रही हो। वह कहने लगी मुझे दादाजी ऐसे मे मजा आता है, मैंने उसे कहा लेकिन तुम यह सब क्यों कर रही हो। वह कहने लगी मै नए-नए तरीके से सेक्स करना चाहती हूं और आपको देखकर मुझे ऐसा लगा आपके अंदर अब भी वही जवानी बची है। मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसके होठों को किस करने लगा, मुझे उसे किस करने में बहुत अच्छा महसूस हो रहा था।

मैं उसके साथ बहुत अच्छे से किस करता रहा उसने जब मेरे लंड को अपने मुंह में लिया तो वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करती जाती मैं बहुत ज्यादा खुश था और वह भी बहुत खुश थी। वह लंड को अपने मुंह मे अच्छे से ले रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था। मुझे भी ऐसा महसूस होता जैसे कि वह मेरे लंड को अपने गले तक लेकर अच्छे से चूस रही है मैंने जब उसकी कोमल चूत को चोदना शुरू किया तो मुझे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैंने जब अपने लंड को उसकी योनि में प्रवेश करवाया तो वह तेज आवाज मे चिल्लाने लगी और कहने लगी मुझे बड़ा मजा आ रहा है। उसकी चूत बहुत ही टाइट थी उसे चोदने में मुझे बहुत मजा आता लेकिन मैं उसकी टाइम चूत के मजे ज्यादा समय तक ना ले सका। उसने मेरे सामने अपने कपड़े पहने उसका हॉट फिगर देखकर मैं तो उसकी तरफ पूरे तरीके से फिदा हो गया। रचना भी अपनी चूत मरवाने के लिए बेताब रहती लेकिन मैंने काजल को समझा दिया कि तुम रचना से दूर ही रहो पर वह उसकी संगत में पड़ चुकी थी और मुझे डर था कही काजल रचना की तरह ना हो जाए परंतु मैं हमेशा ही उसे समझाता रहता। मैं जब भी रचना से मिलने के लिए जाता तो हम दोनो होटल में रुका करते रचना मेरा बुढापे का सहारा है।


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