गांड फाडकर चोद दिया भाभी को

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Gaand faadkar chod diya bhabhi ko सुबह खिड़की खोलते ही सूरज की किरणें अंदर आ चुकी थी और मैंने प्रतिभा से कहा कि प्रतिभा तुम आज अपनी मम्मी के घर जाने वाली हो तो वह मुझे कहने लगी हां हरीश मैं आज बच्चों को लेकर मम्मी के पास जा रही हूं। मैंने प्रतिभा से कहा ठीक है तो तुम वहां से कब लौटोगी प्रतिभा मुझे कहने लगी कि वहां से लौटने में तो मुझे समय लग जाएगा लेकिन मैं यह कहना चाहती हूं कि तुम अपना ध्यान तो रख लोगे ना। मैंने प्रतिभा से कहा हां प्रतिभा मैं घर का ध्यान रख लूंगा और यह कहते हुए मैं नहाने के लिए चला गया। मैं जब नहाने के लिए गया तो उस वक्त प्रतिभा मेरे लिए नाश्ता बनाने के लिए रसोई में चली गई थी दोनों बच्चे भी गहरी नींद में सो रहे थे। मैं नहाकर जब बाहर निकला तो प्रतिभा मुझे कहने लगी कि आइए मैं आपके लिए नाश्ता लगा देती हूं मैंने प्रतिभा से कहा अभी थोड़ा रुक जाओ। प्रतिभा मुझे कहने लगी कि आप नाश्ता कर लीजिए मैंने प्रतिभा को कहा चलो मेरे लिए तुम नाश्ता लगा ही दो।

प्रतिभा ने मेरे लिए नाश्ता लगा दिया मैंने नाश्ता कर लिया था और उसके बाद मैं प्रतिभा से कहने लगा कि मैं अपने काम से जा रहा हूं तुम टैक्सी कर के चले जाना। प्रतिभा कहने लगी कि हां मैं टैक्सी कर के निकल जाऊंगी तुम उसकी चिंता मत करो। मैं अपने काम के सिलसिले में जा चुका था और मुझे एक जरूरी मीटिंग से जाना था इसलिए मैं प्रतिभा और बच्चों को नहीं छोड़ सकता था। शाम के वक्त जब मैं घर लौटा तो उस वक्त घर काफी सुनसान था बहुत वीरान सा भी लग रहा था क्योंकि बच्चों की चहल-पहल और उनकी आवाज से घर गूंजता रहता है और घर में रौनक बनी रहती है लेकिन वह लोग अपने नानी के घर जा चुके थे। मैंने प्रतिभा को फोन किया तो वह कहने लगी कि मैं मम्मी के घर पहुंच चुकी हूं बच्चों की भी स्कूल की छुट्टियां पड़ी थी इसलिए प्रतिभा चाहती थी कि कुछ दिनों के लिए वह अपनी मम्मी से मिल आये। मैं घर पर अकेला ही था मेरे भैया प्रताप का फोन मुझे आया और वह कहने लगे कि हरीश तुम कहां हो मैंने भैया से कहा भैया मैं तो घर पर ही हूं तो वह कहने लगे कि क्या तुम अभी मेरे पास आ सकते हो।

मैंने भैया से कहा भैया बताइए कोई जरूरी काम था क्या वह कहने लगे तुम यहां आ तो जाओ फिर मैं तुम्हें बताता हूं और जब मैं भैया के पास रात के वक्त गया तो मैंने भैया के घर की डोर बेल बजाई और भैया ने दरवाजा खोला तो वह मुझे कहने लगे हरीश बैठो। मैं बैठ गया मैंने भैया के उतरे हुए चेहरे को देखते ही उनसे पूछा भैया सब कुछ ठीक तो है ना भैया कहने लगे हां हरीश सब कुछ ठीक तो है लेकिन एक समस्या है जो कई दिनों से मुझे अंदर से खाए जा रही है मैंने सोचा तुम से इस बारे में बात करूं। मैंने भैया से कहा भैया लेकिन अचानक से ही आपको ऐसी कौन सी परेशानी आ गई जिससे कि आप इतने ज्यादा परेशान हो गए हैं और अंदर ही अंदर आपको तकलीफ होने लगी है। भैया मुझे कहने लगे कि हरीश तुम्हें क्या बताऊं रितेश अब मेरे हाथ से निकल चुका है और वह हमारे कहने सुनने में बिल्कुल भी नहीं है, ना ही वह मेरी बात सुनता है और ना ही तुम्हारी भाभी की वह बात मानता है तुम्हारी भाभी तो इस बात से बहुत परेशान हो चुकी है कि आखिर हमे ऐसा क्या करना चाहिए जिससे रितेश को समझ आ जाए और वह अपने दोस्तों को छोड़ दे और ऊपर से आजकल वह एक लड़की के पीछे इतना पागल हो चुका है कि यदि उससे इस बारे में कुछ भी बात करो तो वह हमसे अच्छे से बात ही नहीं करता अब तुम ही बताओ हमें क्या करना चाहिए। भैया की आंखों में नमी थी मैंने भैया से कहा भैया आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए सब कुछ ठीक हो जाएगा आप थोड़ा समय रितेश को भी दीजिए। भैया कहने लगे रितेश को हम लोगों ने आज तक कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी और ना ही हम लोगों ने उसे कभी भी किसी चीज के लिए मना किया है आखिर रितेश के सिवा हमारा इस दुनिया में है ही कौन। मैंने भैया से कहा भैया वह तो आप बिल्कुल ठीक कह रहे हो लेकिन आपको भी थोड़ा रितेश को समझना चाहिए।

भैया को भी अपनी गलती का एहसास था क्योंकि उन्होंने भी रितेश के साथ कभी समय नहीं बिताया था इसी वजह से तो रितेश उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता था और वह उनसे बहुत दूर जा चुका था लेकिन मैंने रितेश को समझाने की कोशिश की और मैंने रितेश से कहा देखो रितेश तुम्हें अपने पापा मम्मी के बारे में भी सोचना चाहिए। रितेश मुझे बहुत मानता था इसलिए वह मेरी बहुत इज्जत भी करता है हालांकि रितेश अब बड़ा हो चुका है और वह सारी चीजों को समझने लगा है वह अब कॉलेज में पढ़ाई करता है और उसे भी अपना जीवन जीने का पूरा अधिकार है लेकिन भैया की चिंता भी बिल्कुल जायज थी वह भी अपनी जगह ठीक थे। मैंने रितेश को समझाया तो वह मुझे कहने लगा कि चाचा जी आज के बाद मैं इन बातों का ध्यान रखूंगा और घर में पापा मम्मी से अच्छे से बात करूंगा। भैया भी इस बात से थोड़ा निश्चिंत हो चुके थे कि कम से कम अब रितेश घर पर तो अच्छे से बात करता है और वह उनके साथ भी समय बिताने लगा था। प्रतिभा अभी भी अपने मायके में ही थी मैंने प्रतिभा को फोन किया और उसे कहा कि तुम कब आ रही हो तो वह कहने लगी अगले हफ्ते तक मैं आ जाऊंगी। मैंने प्रतिभा से कहा ठीक है लेकिन तुम अगले हफ्ते तक जरूर आ जाना तो वह कहने लगी हां हरीश मैं जरूर आ जाऊंगी।

प्रतिभा अभी तक अपने मायके से नहीं लौटी थी और मैं प्रतिभा का इंतजार कर रहा था। हमारे पड़ोस में भाभी अक्सर मुझे देखा करती थी उनका नाम सुजाता है। भाभी की प्यासी नजरे अक्सर मुझ पर ही रहती थी मैंने सोचा कि क्यों ना सुजाता भाभी को अपने बातों में फंसा लिया जाए। सुजाता भाभी को मैंने अपनी बातों में फंसा लिया वह मुझसे मिलने के लिए घर पर आई उनके पति से वह खुश नहीं थी और उनके पति भी उनकी इच्छा पूरी नहीं कर पा रहे थे इसलिए उन्होंने मुझे कहा कि आप आज मुझे चोदकर अपना बना लीजिए। उनके अंदर की आग को मै समझ सकता था उनके पति से उनकी बिल्कुल भी नहीं बनती थी वह दोनों ही एक दूसरे से बिल्कुल भी खुश नहीं थे और इसका ही फायदा मुझे मिला। सुजाता भाभी ने मुझे कहा कि आप मुझे अपनी बाहों में भर लो तो मैंने उन्हें अपनी बाहों में भरते हुए अपने लंड को बाहर निकाला मैं अपने लंड को हिलाते हुए मुठ मारने लगा। सुजाता भाभी से मैंने कहा कि आप इसे अपने मुंह में ले लीजिए। भाभी ने लंड को हिलाकर खड़ा कर दिया जब मेरा लंड तन कर खड़ा हो चुका था तो वह मुझे कहने लगी कि मैं आपके लंड को मुंह में ले रही हूं। उन्होंने जैसे ही मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समाया तो मुझे भी बड़ा अच्छा महसूस होने लगा और उन्हें भी अच्छा लग रहा था काफी देर ऐसा करने के बाद जब मैंने उनके कपड़ों को उतारना शुरू किया तो उनकी ब्रा को देखकर में पूरी तरीके से मचलने लगा उनकी लाल रंग की ब्रा ने मुझे अपनी और खींच लिया था और मैंने उनके स्तनों को अपने मुंह में लिया तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा। मैं उनके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था वह मुझे कहने लगी हरीश जी अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। मैने उन्हे कहा आप अपनी सलवार को भी खोल दीजिए उन्होंने अपनी सलवार को जैसे ही खोला तो मैंने उनकी पैंटी को उतारकर उनकी चूत पर अपनी जीभ को लगाया तो उनकी चूत पर हल्के बाल थे। मैं उनकी चूत को चाटकर बहुत ही खुश हो गया था मैंने काफी देर तक उनकी चूत का मजा लिया और मुझे बड़ा ही अच्छा लगा।

जब मैंने अपने लंड को उनकी योनि पर लगाया तो वह कहने लगी मेरी योनि बहुत गर्म हो चुकी है और आग बाहर की तरफ को छोड रही है आप आज मेरी चूत की आग को अच्छे से बुझा दीजिएगा। मैंने भाभी से कहा भाभी आप बिल्कुल भी चिंता ना करें आज मैं आपकी चूत की आग को बड़े अच्छे तरीके से बुझा दूंगा आप बिल्कुल भी चिंता ना करें। यह कहते ही मैंने जब अपने लंड को धीरे से उनकी योनि के अंदर घुसाया तो मेरा लंड उनकी योनि के अंदर जा चुका था और जैसे ही मैंने अंदर की तरफ को लंड डाला तो वह चिल्लाने लगी मेरा लंड उनकी योनि की दीवार से टकराने लगा था मैंने अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया तो उनके मुंह से आह आह की आवाज निकलने लगी और मुझे भी बड़ा अच्छा लगने लगा। उनके मुंह से जिस प्रकार की आवाज निकल रही थी उस समय उन्हें बड़े अच्छे तरीके से मै धक्के मार रहा था मैंने उनकी चूत से तेल भी बाहर निकाल कर रख दिया था।

वह मुझे कहने लगी मैं ऐसे ही किसी को ढूंढ रही थी जो मेरी चूत को फाड़ कर रख दे और आपने आज मेरी इच्छा को अच्छे से पूरा कर दिया मैं बहुत खुश हूं। जब मैंने अपने वीर्य को भाभी की योनि में गिराया तो वह बहुत खुश हो गई मैंने भी अपने लंड पर तेल लगाकर उसे खड़ा कर दिया। मेरा लंड लंबा हो चुका था मैंने अब भाभी की गांड के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह चिल्लाने लगी और उनकी गांड फट चुकी थी। मैं बड़ी तेजी से उन्हें धक्के मार रहा था और उनकी गांड के अंदर बाहर मेरा लंड हो रहा था मुझे बड़ा मजा आ रहा था और उन्हें भी बहुत मजा आ रहा था लेकिन यह सब ज्यादा देर तक नहीं चल पाया। जब उनकी गांड मेरे लंड से टकराती तो मैंने उन्हें कहा अब मुझसे हो नहीं पाएगा तो वह कहने लगी मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा है आप अपने वीर्य को अंदर ही गिरा दीजिए लेकिन 5 मिनट तक में उनकी गांड का मजा ले जा रहा। जब हम दोनों की इच्छा भर गई तो मैंने अपने वीर्य को उनकी गांड की शोभा बना दिया।


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