जवानी अभी बाकी है

Jawani abhi baaki hai:

kamukta, antarvasna मेरी उम्र आज 60 वर्ष हो चुकी है, इन 60 वर्षों में मैंने अपने जीवन में बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखे एक वक्त ऐसा भी था जब मेरे पास खेतों में फसल बोने के लिए पैसे भी नहीं थे उस वक्त मैंने कुछ पैसा कर्ज़ के तौर पर साहूकार से लिया था और वह पैसा मैंने कुछ समय बाद ही चुका दिया। मैंने अपने बच्चों को कभी भी अच्छी शिक्षा से दूर नहीं रखा और मुझसे जितना हो सकता था मैंने उन्हें पढ़ाया और जब उन लोगों की पढ़ाई पूरी हो गई तो वह लोग शहर नौकरी की तलाश में चले गए क्योंकि गांव में रोजगार का भाव था इसलिए उन्हें तो शहर जाना ही था, जब वह लोग शहर गए तो मैं और मेरी पत्नी गांव में अकेले रह गए हमारे साथ उस वक्त मेरी बेटी भी रहती थी मेरी बेटी हम लोगों का काफी ध्यान रखती लेकिन जब उसकी शादी की उम्र हो गई तो हम लोगों ने उसके लिए लड़का देखना शुरू कर दिया, मैंने अपनी लड़की को बहुत ही प्यार से रखा था इसलिए मैं नहीं चाहता था कि उसकी शादी किसी भी गलत व्यक्ति के साथ हो जाए।

जब काफी ढूंढने के बाद मुझे एक लड़का समझ आया तो मैंने उससे अपनी लड़की की सगाई करवा दी परन्तु मुझे नहीं पता था कि वह लोग उसकी जल्दी शादी के लिए जिद करेंगे, उन लोगों ने कहा कि आपको शादी जल्दी ही करवानी होगी, मैंने भी शादी जल्दी में करवा दी मेरे पास मेरी जितनी भी जमा पूंजी थी वह सब खत्म हो गई थी लेकिन मेरी लड़की की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई जिसकी मुझे बहुत खुशी है, अब वह भी अपने ससुराल जा चुकी थी मैं और मेरी पत्नी गांव में अकेले ही रह गए थे हम लोग पूरी तरीके से खेती पर ही निर्भर है इसलिए हम लोग खेत नहीं छोड़ सकते, मेरे बच्चे मुझे कहने लगे कि पिताजी आप हमारे साथ रहने के लिए आ जाए लेकिन मुझे ना तो कभी शहर रास आया और ना ही मैं कभी वहां जाना चाहता था इसलिए मैंने गांव में ही रहना उचित समझा। वह लोग जब भी हम से मिलने के लिए गांव आते तो मुझे हमेशा लगता कि वह लोग बहुत खुश हैं मेरे तीन लड़के हैं तीनों ही शहर में अच्छी नौकरी करते हैं लेकिन मुझे उस वक्त बहुत धक्का लगा जब मेरा सबसे छोटा लड़का सार्थक बहुत परेशान था मुझे यह बात मेरे बड़े लड़के ने बताई और कहा कि पिताजी आजकल सार्थक का काम कुछ ठीक नहीं चल रहा।

मैंने सार्थक को फोन किया तो सार्थक मुझे कभी कुछ बताना ही नहीं चाहता था मैंने उस पर जोर डालते हुए कहा कि यदि तुम मुझे नहीं बताओगे तो तुम यह बात किसे बताओगे आखिरकार मैं तुम्हारा पिता हूं और मेरी भी अभी तुम्हें लेकर कुछ जिम्मेदारियां हैं, वह कहने लगा नहीं पिताजी ऐसी तो कोई बात ही नहीं है लेकिन जब मैंने उस पर इस बात के लिए जोर डाला तो वह कहने लगा पिताजी मेरी नौकरी छूट चुकी है और मैं आजकल घर पर ही खाली बैठा हूं, मैंने उसे कहा तुम मुझे अपना अकाउंट नंबर दे देना मैं उसमें कुछ पैसे भिजवा दूंगा, वह कहने लगा नहीं पीता जी मैं आपको अपना अकाउंट नंबर नहीं दे सकता, मैंने उसे बहुत कहा लेकिन वह मेरी बात नहीं माना और उसने फोन रख दिया। मैंने अपनी बहू नीलम को फोन किया था नीलम कहने लगी हां पिताजी कहिए क्या बात थी? मैंने नीलम से कहा देखो बेटा तुम मेरी बेटी हो और सार्थक मुझे कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। नीलम से मैंने कहा कि बेटा तुम मुझे अपना अकाउंट नंबर भिजवा देना ताकि मैं उसमे कुछ पैसे भिजवा सकूं, उसने मुझे सार्थक का अकाउंट नंबर दे दिया और मैंने अगले ही दिन उसमें कुछ पैसे डलवा दिए, सार्थक तो मुझसे कुछ भी बात नहीं कहता था लेकिन मैं नीलम से पूछ लिया करता नीलम मुझे सब कुछ बता दिया करती थी। मैंने नीलम से कहा कि बेटा तुम्हें जब भी पैसो की आवश्यकता हो तो तुम मुझसे कह दिया करो, वह कहने लगी पिता जी यह तो मुझे बहुत डांटते हैं मैंने उनसे कहा भी था कि मैं अपने मायके में पैसों को लेकर बात करती हूं लेकिन इन्होंने तो साफ मना कर दिया यह तो किसी से भी पैसा नही लेना चाहते हैं और ना ही इनका काम कुछ ठीक चल रहा है लेकिन अब आप ही बताइए कि मैं इस स्थिति में क्या कर सकती हूं, मैंने नीलम से कहा कोई बात नहीं बेटा तुम चिंता मत करो तुम अपना ध्यान रखो।

मेरी बात सार्थक से भी हो जाया करती थी और मैं उसे हमेशा समझाता था कि बेटा तुम अपना ध्यान रखो, सार्थक के बच्चे भी अभी छोटे हैं उसकी दो बेटियां हैं और दोनों की उम्र साथ 8 वर्ष की है, सार्थक का काम बिल्कुल भी ठीक नहीं चल रहा था उसे एक जगह नौकरी तो मिली थी लेकिन उसका गुजर-बसर वहां अच्छे से नहीं हो पा रहा था इसलिए मैंने शहर जाने की सोची और मैंने अपनी पत्नी से कहा कि मैं कुछ दिनों के लिए शहर जा रहा हूं, वह कहने लगी कि आप भला शहर जाकर क्या करोगे, मैंने उसे समझाया कि देखो इस वक्त सार्थक को हमारी जरूरत है यदि मैं वहां नहीं जाऊंगा तो वह टूट जाएगा और वैसे भी वह काफी परेशान भी है। मैं अगले ही दिन शहर चला गया और जब मैं शहर पहुंचा तो मैंने सार्थक को फोन किया, सार्थक कहने लगा पिता जी क्या आप यहां आ चुके हैं? मैंने उसे कहा हां मैं यहां आ चुका हूं। वह मुझे लेने के लिए रेलवे स्टेशन आया और अपने साथ अपनी मोटरसाइकिल पर मुझे घर लेकर चला गया, नीलम ने मुझे देखते ही मेरे पैर छुए और कहने लगी पिता जी आपने अच्छा किया जो हम से मिलने के लिए आ गए, सार्थक मुझे कहने लगा पिताजी मुझे अभी कहीं जाना है आप नीलम के साथ बात कीजिए मैं कुछ देर बाद आता हूं, सार्थक यह कहते हुए चला गया मैंने भी मुंह हाथ धोया और मैं नीलम के साथ बैठ गया नीलम और मैं बात कर रहे थे।

मैंने नीलम से कहा बच्चे दिखाई नहीं दे रहे है, वह कहने लगी पिताजी बच्चे अभी ट्यूशन पढ़ने गए हैं बस कुछ ही देर बाद आते होंगे, मैंने नीलम से कहा कि देखो बेटा यदि कोई परेशानी है तो तुम लोग मेरे साथ गांव चलो वहां पर कुछ समय तुम हमारे साथ रहना, वह कहने लगी पिताजी लेकिन इन्हें छोड़कर मैं कैसे गांव आ सकती हूं आप तो देख ही रहे हैं कि इनका काम आजकल कुछ ठीक नहीं चल रहा एक जगह इनकी नौकरी लगी है लेकिन वहां भी इन्हें रात को जाना पड़ता है फिर यह सुबह लौटते हैं, वहां भी तनख्वाह कम है लेकिन हम लोग फिर भी इतने पैसों में गुजर-बसर कर रहे हैं, मैंने नीलम से कहा देखो यदि तुम लोग मेरे साथ गांव चलोगे तो सार्थक पर बहुत कम बोझ पड़ेगा और उसका खर्चा भी कम होगा,  नीलम कहने लगी पिताजी देखते हैं यदि कुछ दिनों बाद इनकी किसी अच्छी जगह पर नौकरी नहीं लगी तो मैं आपके साथ अपने बच्चों को लेकर गांव चली आऊंगी लेकिन आप कुछ दिन यहां रुक जाइये, मैंने नीलम से कहा ठीक है मैं कुछ दिन तुम लोगों के साथ रुक जाता हूं। मैंने कुछ पैसे नीलम को दे दिए, नीलम कहने लगी पिता जी मैं आपके लिए खाना बना देती हूं आपको सफर में भूख लग गई होगी, मैंने नीलम से कहा मेरी इच्छा तो खाना खाने की नहीं है लेकिन तुम मेरे लिए एक कप चाय बना देना, मैंने चाय पी और उसके बाद मैं कमरे में लेट गया तब तक सार्थक भी आ चुका था सार्थक के साथ भी मैंने कुछ देर बाद की लेकिन वह अच्छे से बात नहीं कर रहा था क्योंकि उसके दिमाग में सिर्फ उसकी नौकरी को लेकर चिंता चल रही थी इसलिए मैंने भी उससे ज्यादा बात नहीं की, जब वह अपनी ड्यूटी पर चला गया तो नीलम मुझे कहने लगी पिताजी आप खाना खा लीजिए, मैंने नीलम से कहा बस थोड़ी देर बाद ही मैं खाना खा लूंगा, मैंने कुछ देर बाद खाना खा लिया और मैं कमरे में लेट गया।

मैं जब कमरे में लेटा हुआ था तो मेरी बहू नीलम कमरे में आई और कहने लगी पिताजी मुझे आपसे कुछ बात करनी थी। मैंने उसे कहा हां बहू कहो तुम्हें क्या बात करनी थी वह मेरे पास आकर बैठी उसने नाइटी पहनी हुई थी। वह जब मेरे पास आकर बैठी तो उसकी गांड मेरे पैर पर आकर लग गई मेरा मन मचलने लगा था परंतु मुझे अपनी मर्यादाओं का ध्यान भी रखना था इसलिए मैंने कुछ नहीं किया परंतु जब वह मुझसे बात करती तो मैं सिर्फ उसके स्तनों के उपर नजर मारता। मेरा मन भी मचलने लगा था मैंने जब नीलम को अपनी बाहों में लिया तो वह मेरी बाहों में आ गई। वह मुझे कहने लगी आप यह क्या कर रहे हैं मैंने उसे कहा कोई बात नहीं बस थोड़ी देर की बात है उसके बाद तुम्हें सब अच्छा लगने लगेगा। मैंने उसके बदन को चाटना शुरू किया और उसकी नाइटी को ऊपर करते हुए उसकी चूत को मैंने चाटा उसकी चूत से पानी निकलने लगा।

मैंने अपने काले और मोटे लंड को उसके चूत में घुसा दिया उसके मुंह से चीख की आवाज निकल पड़ी वह चिल्लाने लगी उसकी सिसकियो से मै और भी ज्यादा उत्तेजित होता उसके दोनों पैर को चौडे थे जिससे कि उसके अंदर की गर्मी भी लगातार बढने लगी और मेरे अंदर भी जोश बढ़ने लगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसे चोद रहा था वह मेरा पूरा साथ देने लगी वह मुझे कहने लगी आपका लंड बड़ा ही मोटा है। मैंने उसे कहा लेकिन तुम यह बात सार्थक को मत बताना। वह कहने लगी मुझे तो आपके साथ सेक्स करने मे बड़ा अच्छा लग रहा है मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि आपके मोटा लंड को मैं अपनी चूत में ले पाऊंगी। सार्थक ने तो मेरी तरफ देखना बंद कर दिया है लेकिन आपने उसकी कमी को पूरा किया मुझे बहुत अच्छा लग रहा है आप मुझे चोद रहे हैं। उसकी गोरी टांगो को मैंने अपने कंधों पर रख लिया और उसे तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए। मेरे धक्के इतने तेज होते कि उसके मुंह से चीख निकल जाती जब मेरा वीर्य मैंने उसके बड़े स्तनों पर गिराया तो उसके चेहरे की मुस्कुराहट देखकर मुझे भी बहुत खुशी मिली। हम दोनों रात को एक साथ सो गए, मैंने रात भर उसकी चूत के मजे उठाए मुझे एहसास हुआ मैं अब भी पहले जैसा जवान हूं। मैं जब भी नीलम को देखता तो उसे देखकर मुझे उसे चोदने का मन कर ही जाता।


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