कमसिन चूत की पेलम पिलाई

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Kamsin chut ki pelam pilayi अपने ऑफिस की टेबल पर बैठकर मैं अपने पेपरवेट को बार-बार अपने टेबल पर घुमाए जा रहा था यह सब करते हुए मुझे कुछ ही सेकंड हुए थे पेपरवेट मेज पर घूम रहा था तभी मेरे साथ काम करने वाले सहकर्मी ने मुझे कहा कि सुनील तुम यह क्या कर रहे हो। मैंने उन्हें बताया कि बस ऐसे ही कुछ सोच रहा था तो पेपरवेट को घुमा रहा था मुझे मेरे सहकर्मी कहने लगे सुनील घर में सब कुछ ठीक तो है ना मैंने उन्हें कहा हां सर घर में तो सब कुछ ठीक है। वह मुझे कहने लगे यदि कोई परेशानी की बात है तो तुम मुझसे अपनी बात को शेयर कर सकते हो मैंने कहा नहीं सर कोई भी परेशानी की बात नहीं है। कुछ देर बाद वह अपनी कुर्सी पर बैठ गए मैं भी अब अपने काम पर ध्यान देने लगा और अपना काम करने लगा शाम के वक्त मैं जब घर के लिए निकला तो मेरे दिमाग में सिर्फ यही चल रहा था कि क्या मोहनी और मेरे रिश्ते ज्यादा समय तक चल पाएंगे।

हम दोनों की शादी को अभी सिर्फ तीन महीने ही बीते हैं लेकिन अभी तक हमारे रिश्ते की डोर बहुत कच्ची है और मुझे लगता है कि शायद हम दोनों एक दूसरे के लिए कभी बने ही नहीं थे। मैं अपने काम पर ध्यान देने वाला एक सीधा-साधा सा इंसान हूं और मोहनी के बड़े-बड़े सपने हैं वह चाहती है कि वह अपने हिसाब से चले। हमारे परिवार में कुछ चीजों को लेकर रोक टोंक जरूर है लेकिन हमारे परिवार में सब लोग एक दूसरे से प्यार बहुत करते हैं हम लोग घर में 6 सदस्य हैं और मोहनी के आने के बाद घर की स्थिति पूरी बदल चुकी है। मोहनी अब वैसी नहीं रही जैसी वह पहले थी वह घर में मेरी मां से हमेशा झगड़ती रहती है और मैं इसी बात से परेशान था मैं यह बात किसी को बता भी तो नहीं सकता था इसीलिए मैंने अपने ऑफिस में भी यह बात किसी को नहीं बताई थी। मैं जब घर पहुंचा तो मेरी मां अपने कमरे में बैठी हुई थी और मोहनी दूसरे कमरे में बैठी हुई थी मुझे उन दोनों को देखकर ही लगा था कि जरूर आज इन दोनों के बीच में कोई तो बात हुई है। मैं जैसे ही अपने कमरे में गया तो मोहनी मुझसे बोलने लगी मैं ज्यादा दिनों तक अब यहां पर नहीं रहने वाली हूं मेरे मां-बाप ने मुझे यहां पर नौकर बनाकर नहीं भेजा था जो तुम्हारी मां मुझ पर इतना हुकुम चलाती रहती है।

मोहनी पर मां ने कभी भी दबाव नहीं बनाया लेकिन ना जाने क्यों मोहनी को ऐसा लगता कि उस पर दबाव बनाया जा रहा है और वह इस बात को लेकर बहुत ही ज्यादा चिंतित रहती थी। आए दिन घर में झगड़े होते रहते थे मैं इस बात से बहुत ज्यादा परेशान हो चुका था मेरा परेशान होना भी लाजमी था क्योंकि मोहनी को लेकर घर में अब कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं था ना तो मेरे पापा कुछ कहने को तैयार थे और ना ही मेरी मां मोहनी को लेकर कोई बात कहने को तैयार थी। वह लोग मोहनी से बात ही नहीं किया करते थे कुछ समय बाद मोहनी अपने घर चली गई और उसने कोर्ट में मुझसे तलाक के लिए अपील कर दी। मैं बहुत ज्यादा परेशान रहने लगा था और ऑफिस में भी सब लोग मेरी तरफ ऐसे देखा करते जैसे कि मेरी ही गलती हो हालांकि मेरे मुंह पर तो कोई कुछ नहीं कहता था लेकिन मेरी पीठ पीछे सब लोग मेरी बुराइयां करते रहे होंगे। अब ऑफिस में भी हो बात आग की तरह फैल चुकी थी कि मेरा और मेरी पत्नी का तलाक होने वाला है तो इस बात से हमारे ऑफिस के कुछ लोग मजे भी लिया करते थे। मैं बहुत ही ज्यादा परेशान रहने लगा था और मेरे परेशानी का मुझे कोई हल ही नहीं मिल रहा था। एक दिन मैं अपने ऑफिस से पैदल ही लौट रहा था तभी सर पर केसरी रंग का दुपट्टा बांधे हुए और सफेद रंग की वेशभूषा में एक साधु मुझे मिले उन्होंने मुझे कहा कि बच्चा तुम बहुत ही परेशान हो। उनके हाथ में एक तोता भी था मैंने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया ऐसा तो अक्सर राह चलते कोई भी मिल जाता था लेकिन जब उन्होंने मुझसे मेरी पत्नी को लेकर बात कही तो मेरे कदम अपने आप ही रुक गए। वह कहने लगे कि तुम बहुत ही परेशान हो तुम्हारी परेशानी की वजह सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी पत्नी है। मैंने भी अपनी जेब से सौ का नोट निकालते हुए उन बाबा को दिया और कहा बाबा बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए।

उन्होंने मुझे कहा कि जल्दी तुम्हारी सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आया कि मेरी समस्या कैसे दूर हो जाएंगी। मैंने उनसे कहा लेकिन आप बताइए तो सही तो वह कहने लगे कि तुम रविवार के दिन पीली कमीज पहन कर निकलना जरूर तुम्हारा भला हो जाएगा तुम्हारे सारे कष्ट तुमसे दूर भाग जाएंगे और तुम्हारे सारे दुख दर्द ठीक हो जाएंगे। मैंने उन्हें कहा ठीक है बाबा मैं अभी चलता हूं लेकिन मुझे उनकी बातों पर यकीन नहीं था मैं अपने घर पहुंचा तो मेरे दिमाग में उन्हीं बाबा का चेहरा आ जाता। उनकी बड़ी घनी दाढ़ी और उनके वेशभूषा से मुझे वह कोई पाखंडी तो नजर नहीं आ रहे थे क्योंकि उन्होंने मुझे मेरी पत्नी के बारे में सब कुछ सच कहा था। मेरे पास सिर्फ भरोसा करने के सिवा और कोई रास्ता नहीं था और मैं रविवार का इंतजार करने लगा। मैं रविवार का बेसब्री से इंतजार कर रहा था मैंने अपनी पीले रंग की कमीज को प्रेस कर के रख दिया था और जिस दिन रविवार था उस दिन सुबह मैं नहा धोकर वह कमीज पहन कर बैठ गया। मैं अपने जीवन में कुछ अच्छा होने की उम्मीद से ही अपने दिल में ना जाने कितने ही ख्याल पाल कर बैठा हुआ था।

मै कमीज पहन कर बैठा ही हुआ था तभी मेरे एक परिचित का फोन मुझे आया वह कहने लगे मुझे तुमसे मिलना था। उनका फोन मुझे काफी समय बाद आया था मैंने कभी भी कल्पना नहीं की थी कि उनका फोन मुझे आएगा लेकिन उनसे मिलने के लिए मैं चला गया। जब उनसे मिलने के लिए मैं गया तो उनके ही घर पर एक सुंदर सी लड़की आई हुई थी उसकी उम्र यही कोई 25 वर्ष की रही होगी इत्तेफाक की बात ही थी वह भी मुझे बड़े ही ध्यान से देख रही थी। उसकी नजरें मेरे लिए तड़प रही थी वह अपनी प्यार भरी नजरों से मुझे देख रही थी। मैंने जब उस लड़की से उसका नंबर लिया तो उसने मुझे अपना नंबर भी दे दिया यह बड़ा ही तोहफा था कि मेरे साथ अचानक से यह क्या हो गया। मैं कुछ समझ नहीं पाया मुझे उन बाबा का ध्यान आया तो उन्होंने मुझे कहा था कि तुम्हारे साथ जरूर सब कुछ ठीक होगा। मैं अपने सारे दुख और परेशानी को भूल कर उस लड़की से बात करने लगा उसका नाम मेघना है। मैं मेघना से फोन पर घंटों बात किया करता और हम दोनों की मुलाकात होने वाली थी। जब हम दोनों की मुलाकात हुई तो उस दिन पहली बार जब मैं मेघना से मिला तो मुझे उससे मिलकर बहुत ही अच्छा लगा। मुझे उससे मिलना इतना अच्छा लगा कि मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि पहली मुलाकात में मैं उसका हाथ पकड़ पाऊंगा। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसके हाथ के स्पर्श से में जैसे उसकी तरफ झुकने लगा था और मुझे अंदर से बहुत खुशी महसूस हो रही थी। मैंने मेघना से कहा हम लोग कहीं चले तो मेघना कहने लगी हां क्यों नहीं हम लोग एक साथ घूमने के लिए चलते है। उस दिन मेघना मेरे साथ ऑटो में बैठी हुई थी जब वह मेरे साथ ऑटो में बैठी थी तो मैंने उसकी जांघ पर हाथ रख दिया उसकी जांघ पर हाथ रखते ही जैसे उसके अंदर की गर्मी बाहर आने लगी वह अपने पैरों को चौड़ा करने लगी। मैंने उसको ऑटो के अंदर ही किस कर लिया उसके होठों पर किस करते ही वह मेरी बाहों में आ गई।

मैंने उसकी जांघो को कसकर पकड़ लिया वह मुझसे चिपकने की कोशिश करने लगी और मुझे भी अच्छा महसूस होने लगा लेकिन मैंने जब उसके स्तनों को दबाना शुरू किया तो वह और भी ज्यादा मचलने लगी थी। मैंने ऑटो वाले को 500 का नोट दिया और उसे कहा तुम किसी अच्छे होटल में मुझे ले चलो। वह मुझे होटल मे ले गया वहां पर मैंने कमरा ले लिया। जब मेघना और मै कमरे में गए तो वहां पर मेघना ने अपने बदन के कपड़े उतारने शुरू कर दिए और उसके बदन के कपड़े उतरते ही मेरा लंड मेरे पैंट को फाडते हुए बाहर की तरफ आने लगा। जब मेघना ने मेरी तरफ देखा तो वह कहने लगी आप इतनी दूर क्यों खड़े हैं पास आ जाइए उसके अंदर की उत्तेजना मुझे साफ नजर आ रही थी। जब मैंने मेघना को लेटाया तो वह मुझे कहने लगा आप मेरे बदन को अपना बना लीजिए। मैंने उसे कहा हां तुम्हारे बदन को मैं अपना बना लूंगा मैंने उसके कोमल और मुलायम स्तनों का रसपान करना शुरू कर दिया। उसकी काली रंग की ब्रा को मैं फाड चुका था और उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। मेघना के बदन की गर्मी साफ मैं महसूस कर रहा था जब धीरे धीरे मैंने मेघना की पैंटी को निकाला तो मैंने अपन लंड को सटा दिया क्योंकि मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था।

मैंने मेघना की चिकनी और मुलायम चूत को चाटना शुरू कर दिया और उसकी योनि को चाटने मे आनंद की अनुभूति होने लगी। उसकी योनि को बहुत देर तक मै चाटता रहा जब उसकी योनि पूरी तरीके से गीली हो गई तो मेरे लंड को अपनी ओर खींचने लगी। वह कहने लगी तुम इसे अंदर डाल दो मैंने भी अपने लंड को मेघना की योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया। उसकी टाइट और चिकनी चूत में मेरा लंड जाते ही उसके मुंह से तेज आवाज निकाली और उसने मेरे बदन को कस कर पकड़ लिया। जिस प्रकार से मैने मेघना के बदन को पकड़ा हुआ था उससे वह बहुत ही मचलने लगी थी और मैं भी उत्तेजित होने लगा। वह अपने दोनों पैरों से मुझे कसकर दबाने की कोशिश कर रही थी। मेरे अंदर से वह मेरी पूरी ताकत को अपनी ओर खींचने की कोशिश करती और उसकी चूत के अंदर मेरी पूरी ताकत खो चुकी थी मेरा वीर्य उसकी योनि में जाते ही मैं धराशाई हो गया।


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