किरण दीदी के साथ रात का मज़ा भाग २

तभी अचानक से दीदी थोड़ा हिली और वो अपना मुहं दूसरी तरफ करके सो गई जिसकी वजह से में बहुत डर गया, लेकिन कुछ देर बाद में थोड़ी हिम्मत करके उनके थोड़ा पास सरक गया और मैंने अपना एक हाथ उनके ऊपर रखा और उनके बूब्स को छूने लगा और अब में अच्छा मौका देखकर झट से किरण दीदी से चिपक गया और फिर मेरा लंड दीदी की गांड पर लग रहा था। में अपने लंड को दीदी की गांड पर धीरे धीरे रगड़ने लगा, लेकिन अब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपना लंड पेंट से बाहर निकाला और एक बार फिर से दीदी की गांड पर रगड़ने लगा। मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था। अब में ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा और में थोड़ी देर में झड़ गया और मुझे कब नींद आई पता ही नहीं चला। फिर में सो गया और में जब सुबह उठा तो मैंने देखा कि दीदी किचन में चाय बना रही है। फिर में भी उनके पर जाकर खड़ा हो गया और फिर हम दोनों पहले तो इधर उधर की बातें करने लगे, लेकिन उसके कुछ देर बाद दीदी मुझसे बोली कि कल पूरी रात मुझे नींद नहीं आई।

में : दीदी, लेकिन ऐसा क्यों?

दीदी : कल रात को एक मोटे चूहे ने मुझे बहुत परेशान किया।

में : क्या दीदी, आप यह क्या कह रही हो, ऐसा कैसे हो सकता है?

दोस्तों में दीदी के उस व्यहवार से अब बहुत अच्छी तरह से समझ गया था और मुझे अब पता चल गया था कि दीदी कल रात सोने का नाटक कर रही थी और वो यह सब बातें घुमा फिराकर मुझसे क्यों कर रही है और इन सब बातों का क्या मतलब है? और अब में भी मज़े लेता गया।

दीदी : मुझे पता नहीं, लेकिन शायद वो कोई बिल ढूंढ रहा था।

में : तो क्या उसे वो बिल मिल गया जिसको वो कल रात ढूंढ रहा था?

दीदी : नहीं यार वो बैचारा कुछ देर मेहनत करने के बाद थककर हार मानकर सो गया।

में :  दीदी तो क्या पता आज उसको उसकी किस्मत से वो बिल मिल भी जाए?

दीदी : हाँ देखते है कि उसकी किस्मत कितनी अच्छी है, मुझे उसका क्या पता?

दोस्तों अब में रात होने का इंतजार करने लगा और जब रात को में सोने के लिए कमरे में गया तो मेरी आँखे वो सब देखकर खुली की खुली रह गई क्योंकि आज दीदी ने एक मिनी स्कर्ट और बहुत ढीला सा टॉप पहना हुआ था। उनके कपड़ो और उनकी सुबह की बातों से मुझे साफ साफ पता चल गया कि दीदी भी मुझसे अब क्या चाहती है? मेरी हिम्मत अब बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी और में अब पूरे जोश में था। फिर जब मैंने देखा कि दीदी सो गई है तो मैंने अपना हाथ दीदी के बूब्स पर रख दिया, लेकिन टॉप के अंदर से कुछ महसूस करके मेरी तो गांड फटकर हाथ में आ गई दोस्तों मैंने महसूस किया कि आज दीदी ने ब्रा नहीं पहनी थी और उनके बूब्स की निप्पल एकदम कड़क थी। मुझे तो यह सब महसूस करके बहुत मज़ा आ रहा था और मेरा लंड अब खड़ा हो चुका था। अब में बूब्स को दबाने लगा वाह क्या बूब्स थे? दोस्तों मुझे मज़ा ही आ गया और अब में बहुत जोश में था फिर मैंने थोड़ी हिम्मत करके टॉप को पूरा ऊपर कर दिया वाह दोस्तों वो क्या मस्त मदहोश कर देने वाला नज़ारा था। दूध जैसे सफेद बूब्स और उस पर गुलाबी कलर की निप्पल मुझसे अब रहा नहीं गया और मैंने एक बूब्स की निप्पल को मुहं में ले लिया और दूसरे बूब्स को में धीरे धीरे सहलाने, दबाने लगा।

फिर मैंने सुना कि दीदी के मुहं से सिसकियाँ निकल गई जिसको सुनकर में समझ गया कि दीदी नींद में नहीं बल्कि वो सिर्फ अपनी दोनों आखें बंद करके सोने का नाटक कर रही है और मेरे साथ साथ पूरे पूरे मज़े ले रही है। अब में ज़ोर ज़ोर से एक बूब्स के निप्पल को चूसता रहा और दूसरे बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाता। अब मैंने कुछ देर बाद महसूस किया कि में और दीदी हम दोनों बहुत जोश में आ गये करीब 15 मिनट तक निप्पल को चूसने, निचोड़ने, दबाने और रगड़ने के बाद में अपना हाथ नीचे ले गया और मैंने किरण दीदी की स्कर्ट को ऊपर किया और जैसे ही मैंने अपना हाथ अंदर डाला तो मेरी गांड एक बार फिर से फट गई। में वो सब महसूस करके एकदम चकित रहा गया क्योंकि मैंने महसूस किया कि किरण दीदी ने पेंटी भी नहीं पहनी थी और मेरा हाथ सीधा उनकी नंगी चूत पर जा लगा जो जोश में आकर बहुत गीली हो गई थी। फिर में अपनी एक उंगली उनकी चूत में अंदर बाहर करने लगा और अब मैंने उनकी स्कर्ट को उतार दिया और उनके टॉप को भी उतारकर उनसे बिल्कुल दूर किया और अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी। फिर मैंने उनकी दोनों जांघो को फैला दिया वाह दोस्तों उनकी क्या मस्त कामुक चूत थी बिल्कुल चिकनी और उस पर एक भी बाल नहीं था। उसको देखकर मुझसे अब रहा नहीं गया और मैंने अपना मुहं उनकी चूत पर रख दिया और फिर में पागलों की तरह उनकी गरम गीली चूत को चूसने लगा और अपनी जीभ को अंदर बाहर करने लगा। 15 मिनट चूसने, चाटने के बाद मैंने दीदी के पैरों को पूरा फैला दिया और अपना लंड किरण दीदी की चूत पर रखा और एक ही ज़ोर के झटके में पूरा का पूरा लंड अंदर डाल दिया। दीदी के मुहं से बहुत ज़ोर की चीख निकली और वो दर्द से छटपटाने लगी। अब मैंने ज़ोर ज़ोर से धक्के मारना चालू कर दिया और अब दीदी भी अपनी गांड को उठा उठाकर मुझसे चुदवा रही थी। फिर में तेज़ तेज़ धक्के मार रहा था और फिर में और दीदी करीब बीस मिनट की धमाकेदार चुदाई के बाद एक साथ झड़ गये और सो गए। दोस्तों यह थी मेरी दीदी के साथ मेरी पहली चुदाई की कहानी जिसमे मैंने उनको पहली बार चोदा, लेकिन उसके बाद मैंने उन्हें बहुत बार चोदा और हमारी यह चुदाई ऐसे ही लगातार दिन रात आगे बढ़ती गई और अब हम दोनों बहुत खुलकर मस्ती से चुदाई करने लगे है ।।

धन्यवाद …


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