लंड और चूत के बीच खेल

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Lund aur chut ke beech khel मैं मां से कहता हूं कि मां क्या मैं सब्जी ले आऊं तो मां कहती है कि हां बेटा तुम बाजार जाकर सब्जी ले आओ। मां ने मुझे सब्जी के लिए कहा था तो मैंने मां से कहा ठीक है मां मैं ही ले आता हूं, मां की तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं थी इसलिए उन्होंने मुझे कहा तो मैं सब्जी लेने के लिए बाजार चला गया। मैं जब सब्जी ले रहा था तो उस वक्त एक लड़की दुकानदार के साथ बड़ा ही मोलभाव कर रही थी मैं उसकी तरफ देखे जा रहा था दिखने में तो वह बड़ी ही साधारण सी लग रही थी लेकिन उसके अंदर कुछ बात तो थी। मैंने उस वक्त उस दुकानदार से कहा भैया मुझे जल्दी से तुम सब्जी दे दो मुझे देर हो रही है उसने मुझे सब्जी दी और मैं अपने घर चला आया। मैं काफी सारी सब्जियां ले आया था क्योंकि मां भी काफी दिनों से बीमार थी तो मैंने सोचा की सब्जी ले आता हूं ताकि मां को परेशानी ना हो। मैंने मां को कहा मां मैंने एक लड़की को सब्जी लेते हुए देखा वह बड़ा ही मोलभाव कर रही थी मां मुझे कहने लगी तो बेटा इसमें गलत क्या है यदि वह मोलभाव कर रही थी तो उसने ठीक ही तो किया।

मैंने मां को कहा मां आप कह तो ठीक रही हैं लेकिन फिर भी इतना मोलभाव करना ठीक नहीं है मां कहने लगी बेटा आजकल सब लोग इतनी मेहनत से पैसा कमाते हैं और एक-एक पैसा बचाकर ही घर चलता है। मैंने मां को कहा ठीक है मां अब आप मुझे जीवन का सार मत बताने लगिये मैंने मां को कहा मां मैं अपने ऑफिस का काम कर लेता हूं। मां कहने लगी कि ठीक है बेटा तुम अपने ऑफिस का काम कर लो मैं अब अपने ऑफिस का काम करने लगा मुझे मेरे दोस्त का फोन आया और वह कहने लगा कि राजेश क्या तुम फ्री हो। मैंने उसको कहा यार मैं अभी ऑफिस का काम कर रहा था मुझे कम से कम एक घंटा तो लग ही जाएगा तो वह कहने लगा कि ठीक है जब तुम एक घंटे बाद फ्री हो जाओ तो मुझे बताना। मैंने अपने दोस्त को कहा ठीक है मैं जैसे ही फ्री हो जाऊंगा तो मैं तुम्हें कॉल कर दूंगा वह मुझे कहने लगा कि हां तुम याद से मुझे फोन कर देना। मैंने उसको कहा ठीक है दोस्त मैं तुम्हें कॉल कर दूंगा और जैसे ही मैं अपने ऑफिस का काम खत्म कर के फ्री हुआ तो मैंने उसे फ़ोन किया और कहा रोहन बताओ तुम क्या कह रहे थे।

रोहन मुझे कहने लगा कि मैं सोच रहा था कि तुम मेरे साथ आज मेरे मामा जी के घर पर चलो मैंने उसे कहा यार मैं तुम्हारे मामा जी को अच्छे से जानता कहां हूं और भला तुम्हारे साथ आकर मैं क्या करूंगा तुम ही चले जाओ रोहन मुझे कहने लगा कि राजेश तुम मेरे साथ चलो ना। रोहन ने मुझे अपनी दोस्ती का वास्ता तक दे दिया और मुझे वह अपने साथ अपने मामा जी के घर पर ले गया जब रोहन मुझे अपने मामा जी के घर पर ले गया तो मैंने कभी कल्पना में भी सोचा नहीं था कि मेरी मुलाकात उसी लड़की से हो जाएगी। मैं उसकी तरफ देखने लगा मुझे जब मालूम पड़ा कि वह रोहन के मामा जी की लड़की है तो मुझे यह बात थोड़ा अजीब सी जरूर लगी की कहीं रोहन को यह बात पता चल जाती तो वह मेरे बारे में क्या सोचता। मैंने रोहन को कहा कि हम लोग यहां कितने देर तक रुकने वाले हैं रोहन कहने लगा थोड़ी देर तक रुकते है। रोहन ने मुझे गौतमी से मिलवाया गौतमी से मिलकर मुझे अच्छा लगा मैंने गौतमी को कहा मैंने आपको आज ही सब्जी लेते हुए देखा था वह कहने लगी कि हां मुझे भी ध्यान आ रहा है कि मैंने आपको देखा था। उस दिन तो गौतमी से मेरी ज्यादा बात नहीं हो पाई रोहन और मैं घर लौट चुके थे और कुछ दिनों बाद मेरी मुलाकात गौतमी से हुई तो मैंने गौतमी को कहा आप यहां कैसे गौतमी मुझे कहने लगी मैं इसी अस्पताल में नौकरी करती हूं। मैं उस दिन अपने किसी परिचित को मिलने के लिए अस्पताल में गया हुआ था गौतमी ने मुझे बताया कि वह नर्स की नौकरी इसी अस्पताल में करती है। मैंने गौतमी को कहा चलिए कम से कम इस बहाने आपसे मुलाकात हो गयी तो गौतमी कहने लगी की हां हम लोग फिर कभी मिलेंगे मैंने गौतमी को कहा ठीक है मैं भी अभी चलता हूं। हम लोगों की उस दिन भी ज्यादा बात नहीं हो पाई अगले दिन भी मैं अस्पताल में गया तो अगले दिन मुझे गौतमी मिली मैंने उससे बात की। जब मैंने गौतमी से बात की तो मुझे अच्छा लगा और उसके बाद तो जैसे मैं और गौतमी एक दूसरे से मिलते ही रहते थे जब भी हम दोनों एक दूसरे को मिलते तो मुझे अच्छा लगता।

हम दोनों के रिश्ते की कोई बुनियाद नहीं थी लेकिन मुझे इतना पता था कि गौतमी से मेरी अच्छी दोस्ती हो चुकी है और हम लोग एक दोस्त होने के नाते एक दूसरे को मिला करते थे। मैं जब भी गौतमी के साथ होता तो मुझे अच्छा लगता था और उसे भी बहुत अच्छा लगता यह सिलसिला बढ़ता ही जा रहा था और धीरे-धीरे यह प्यार में तब्दील होने लगा। हम दोनों को पता ही नहीं चला कि कब हम दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे मुझे इस बात की बहुत खुशी थी कि हम दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे हैं और हमने यह बात अभी तक किसी को बताई भी नहीं थी। गौतमी से मैं जब भी मिलता तो मुझे हमेशा उससे मिलकर एक अलग ही सुकून मिलता था मैं जितना भी परेशान हो जाऊं लेकिन जब भी मैं गौतमी के हंसते और खिलखिलाते चेहरे की तरफ देखता तो मेरी सारी परेशानी एक ही झटके में दूर हो जाया करती थी। एक दिन मैं गौतमी को अपने घर पर ले गया और जब मैंने गौतमी को अपनी मां से मिलाया तो गौतमी को मेरी मां से मिलकर बहुत अच्छा लगा वह मेरी मां के साथ थोड़े ही समय में बहुत अच्छे से घुलमिल गई थी और वह बड़े ही अच्छे से बात करने लगी थी।

मुझे मालूम नहीं था कि गौतमी इतनी जल्दी मेरी मां को अपना मुरीद बना लेगी और उसने मां को यह कहने पर मजबूर कर दिया कि तुम इससे ही शादी कर लो गौतमी तुम्हारे लिए बहुत अच्छी लड़की है। एक दिन गौतमी और मैं साथ में बैठे हुए थे तो उस दिन गौतमी मुझसे पूछने लगी कि राजेश तुमने मुझे कभी इस बारे में नहीं बताया कि तुम्हारे पापा कहां है। मैंने गौतमी को उस दिन सारी सच्चाई बता दी मैंने गौतमी को कहा देखो गौतमी अब तुम से छुपाना कैसा मेरे पापा हमें छोड़कर कई वर्षों पहले चले गए थे और अब तक उनका पता नहीं है कि वह कहां है। गौतमी कहने लगी कि तुम्हारे पापा ने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया मैंने गौतमी को कहा वह तो मां ने सारे घर को संभाल लिया और उन्हीं की बदौलत सब कुछ ठीक हो पाया नहीं तो शायद कुछ भी ठीक नहीं हो पाता। गौतमी के दिल में मेरी मां के प्रति और भी इज्जत बढ़ने लगी। हम दोनों एक दूसरे को हमेशा ही समय दिया करते थे परंतु जब वह समय आया हम दोनों ही एक दूसरे के बदन की गर्मी को महसूस करना चाहते थे और गौतमी भी अपने यौवन की आग को बुझाना चाहती थी। उसके लिए उसने मुझे कहा कि मैं अपने बदन की आग को बुझाना चाहती हू मैं भी कहां अपने आपको रोक पाया। मैंने जब गौतमी को कहा कि क्या मैं तुम्हारे होठों को छू लो तो गौतमी ने मेरे होंठो से अपने होठों को सटा दिया मैंने भी उसके होंठों का रसपान करना शुरू किया उसके नरम और गुलाबी होठों का मै जब रसपान करता तो उसके अंदर की गर्मी भी पूरी चरम सीमा पर पहुंचने लगती। मेरा हाथ गौतमी की योनि की तरफ बढ़ा और मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू किया मैं जब गौतमी की चूत को सहला रहा था तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और गौतमी भी उत्तेजित हो चुकी थी। उसकी उत्तेजना इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मैंने गौतमी को कहा कि क्या तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दूं।

जब मैंने गौतमी से कहा तो गौतमी ने अपनी पैंटी को उतारा और मैंने अपने लंड को गौतमी की चूत के ऊपर लगा दिया। मैंने अपने लंड को गौतमी की चूत पर लगाया और अंदर की तरफ को धकेलना शुरू किया तो मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हो चुका था। जैसे ही मेरा लंड गौतमी की योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो उसके मुंह से एकाएक तेज आवाज निकली मैंने गौतमी को काफी तेजी गति से धक्के देने शुरू कर दिए थे। मैं बहुत तेजी से उसे चोद रहा था मेरी गति बढ़ती ही जा रही थी। मैंने गौतमी को कहा मैं अब रह नहीं पाऊंगा गौतमी भी अपने आपको रोक नही पा रही थी मैंने जैसे ही उसकी चूत के अंदर तक लंड को डाला तो वह कहने लगी अब जाकर मेरी आग थोड़ी सी बुझी है। मैंने अपने धक्को से उसकी चूत से पानी बाहर निकल दिया था उसकी चूत के अंदर मैने वीर्य को गिरी दिया था। मेरा मन अभी भी नहीं भरा था मैंने गौतमी के दोनों पैरों को खोलो और उसकी चूत के अंदर दोबारा से अपने लंड को प्रवेश करवा दिया मेरा लंड उसकी चूत के अंदर तक चला गया और वह चिल्लाने लगी।

मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा और बड़ी तेज गति से उसकी चूत पर मैं प्रहार करने लगा। जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत पर टकराता तो उसकी मादक आवाज तेज आवाज निकालती और मुझे भी अच्छा लगता। मैं कहां रह पा रहा था और ना ही गौतमी अपने आप को रोक पा रही थी हम दोनों ही गरम होने लगे थे। जिस प्रकार से गौतमी और मेरे शरीर से गरमाहट पैदा हो रही थी उस से तो हम दोनों ही अपने आपको रोक नहीं पा रहे थे। मैंने गौतमी को कहा मुझे तो लग रहा है कि तुम्हारी चूत से मै खेलता ही रहूं लेकिन फिलहाल तो मेरा वीर्य गिर चुका है और मेरे अंदर इतनी हिम्मत नहीं है कि मैं तुम्हें और चोद पाऊ। मैंने अपने वीर्य को गौतमी की योनि के अंदर ही गिरा दिया था गौतमी के बदन की गर्मी को मैं जिस प्रकार से महसूस कर पाया वह मेरे लिए एक बड़ा ही मजेदार पल था।


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