मैं और मेरी प्यारी दीदी भाग – ११

हमारा स्टॉप आ गया था दीदी खड़ी हुई मैं भी दीदी के पीछे आगया हम बस से उतरे सामने पापा खड़े थे दीदी को देख के पापा ने फ़ौरन पूछ “क्या हुआ प्रीती तुझे “
दीदी ने कहा की “पापा मैं अब बस मैं नहीं जाउंगी कभी भी ” ये कह के दीदी पापा के गले लग गयी पापा ने “पुछा प्रीती हुआ क्या बेटा बता मुझे क्या हुआ “……..
अब आगे – मुझे लगा की कहीं दीदी पापा को वो सब ना बता दे जो बस में हुआ था कहीं दीदी को पता तो नहीं चल गया था की बस में उनके साथ वो सब कुछ मैं ही कर रहा था मैं बहुत डर गया की कहीं
घर जाके दीदी ने अगर पापा मम्मी को ये सब बता दिया की ये सब मैंने किया है तो मेरा तो पता नहीं क्या हाल होगा मुझे बहुत ज्यदा डर लग रहा था मेरा दिल डरके मारे जोर जोर से धड़क रहा था की क्या
होगा लेकिन फिर मैंने सोचा की दीदी को ये कैसे पता चल सकता है की वो सब मैंने किया है क्योंकि बस में तो बहुत अँधेरा था और जब दुसरे लड़के दीदी से छेड़ छाड़ कर रहे थे तब दीदी को पता था की वो
लड़के कोई और है मैं तो उनके बाद गया था और दीदी पापा को ये सब कैसे बताएगी की उन्होंने किसी का लंड हिलाया अपने हाथों से और अपने बोबे दबाने दिए उन्होंने किसी को मैंने सोचा की पता नहीं क्या
होगा मुझे बहुत ज्यादा डर लग रहा था
फिर पापा ने मुझसे पुछा “सोनू क्या हुआ प्रीती को ” मैंने कहा “पता नहीं पापा मुझे तो ” फिर पापा ने वापस दीदी से पूछा “अरे बेटा बोल ना क्या हुआ क्यों नहीं जाना बस में अब क्या हुआ ” मैंने भी दीदी से बोला “बताओ न दीदी क्या हुआ आपको ” दीदी ने मुझे देखा फिर थोड़ी देर बाद दीदी बोली “पापा बस में कितनी ज्यादा भीड़ रहती है …..” अब मेरी हालत ख़राब हो गयी मैंने सोचा अरे यार लगता है ये दीदी तो आज सब कुछ बताने वाली है पापा को लगता है इन्हें शक हो गया है या शायद पता है इन्हें की मैंने ही सब किया था मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था दीदी ने अपनी बात पूरी की ” पापा बस में कितनी ज्यादा भीड़ रहती है मेरी तो हालत ख़राब हो गयी ना ढंग से बैठने की जगह मिलती है ना खड़े होने की कितनी बदबू आती है मेरी तो हालत ख़राब हो गयी चक्कर आने लग गए सर दुःख रहा है और वोमिटिंग जैसा हो रहा है अब तो मैं कभी कदम ही नहीं रखूँ बस में ” दीदी की पूरी बात सुन के मेरी जान में जान आई मैंने कहाँ बच गए भाई आज तो , ये मन भी साला कमीना होता है अभी अभी जब मुझे डर लग रहा था तब सोच रहा था की भगवान् इस बार बचाले आगे से कभी ज़िन्दगी में एसा कुछ नहीं करूँगा और जैसे ही दीदी की बात खत्म हुई सब ठीक हुआ वैसे ही वापस मेरा ध्यान दीदी की गांड पे चला गया दीदी पापा के साथ जा रही थी और मैं पीछे से उनकी सेक्सी गांड को देख रहा था और सोच रहा था की अभी मेरी इस कमसिन दीदी के बोबे मेरे हाथ में थे और मेरा लंड उनके हाथ में
आज मैंने जो कुछ भी किया था उसपे मैं बहुत गर्व महसूस कर रहा था की आज दीदी ने खुद ने अपने हाथ से मेरा लंड हिलाया और उन्हें पता था की कोई उनके बोबो से खेल रहा है और उन्होंने वो सब कुछ करने दिया अब मेरे मन में यही चल रहा था की अगर मेरी जगह कोई और होता तो वो भी मजे ले लेता दीदी के आखिर दीदी ने मना क्यों नहीं किया या तो दीदी डर गयी थी लेकिन तभी मेरे दूसरे मन ने कहा की कहीं दीदी को भी मजा तो नहीं आ रहा था क्या पता दीदी भी मजे लेना चाहती हो इसलिए सब करने दे रही हो क्योंकि जेसे मेरा मन होता है वैसे ही दीदी का भी तो होता होगा सेक्स करने का और वेसे भी दीदी फोन सेक्स तो करती ही थी अपने bf से तो कहीं दीदी को भी मजा तो नहीं आ रहा था जब मैं उनके बोबे दबा रहा था बस में तभी मेरे मन ने वापस कहा की नहीं यार दीदी बस मजे के लिए इतना रिस्क नहीं ले सकती वो डर ही गयी होगी मैं इन्ही खयालों में था इतने में दीदी ने आवाज दी ” चल ना सोनू घर नहीं चलना क्या वहां क्या खड़ा है ” मैं अपने खयालो से बाहर आया और बोला “हाँ दीदी चलो “
हम दोनों पापा के साथ घर आ गये घर आके दीदी बेड पे बैठ गयी दीदी आलथी पालथी मार के बैठी थी मैं जाके उनके सामने बैठ गया और फिर लेट गया मेरा सर दीदी की गोद में था मैंने धीरे से अपने दोनों हाथ पीछे किये और अपने सर के नीचे रखे और तभी मुझे दीदी के सलवार के सामने की तरफ थोडा गीला गीला सा महसूस हुआ मेरे दिमाग में तुरंत आया की कहीं ये दीदी की चूत का डिस्चार्ज तो नहीं क्या दीदी बस में गरम थी तभी दीदी ने मुझसे कहा “ले सोनू हट मुझे कपडे चेंज करने दे ” मैं हट गया दीदी जाने लगी और मम्मी से बोला “मम्मी में नहा के कपडे चेंज करके आती हु आप सब्जी बना लो रोटी मैं सेक दूँगी , नहाने से कम से कम मूड तो फ्रेश हो जायेगा ” मम्मी ने कहा ” ठीक है नहा ले ” और फिर दीदी अपने रूम में गयी अपने घर के कपडे निकाले टॉवल लिया और नहाने चली गयी मैंने पापा मम्मी से नजरे बचा के दीदी जे रूम में गया और दीदी के बाथरूम के दरवाजे में जो छेद मैंने किया था उसमे से पेपर का टुकड़ा निकाला और बाथरूम के अंदर देखने लगा वेसे मुझे दीदी को वापस नंगी देखने की इच्छा नहीं थी क्योंकि अभी अभी मेरा मुट दीदी ने निकाला था मैं तो बस अपने 1 सवाल का जवाब ढूँढने के लिए बाथरूम में देख रहा था और वो सवाल था ‘ क्या बस में दीदी गरम थी ? ‘ जो भी मैंने दीदी के साथ किया उस से दीदी को केसा लगा मैं बस ये जानना चाहता था
मैंने देखा बाथरूम में दीदी ने पहले अपने बालो का जूडा बनाया फिर अपने कुर्ते पे से अपने कन्धों पे से चुन्नी पे लगी दोनों पिने हटाई फिर अपनी चुन्नी उतार के रखी फिर दीदी ने अपना कुरता उतारा अब दीदी मेरे सामने अपनी ब्रा में आगयी थी दीदी ने वाइट कलर की ब्रा पेहेन रखी थी मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा दीदी की ब्रा और उसके स्ट्रैप्स पूरी तरह से टेड़े मेढे और मुड़े हुए थे दीदी की ब्रा की ऐसी हालत देख के मुझे बस का पूरा सीन याद आ गया की मैंने किस तरह से दीदी के कुर्ते में हाथ डाल के दीदी के बोबो को मसला था ये मुड़ी हुई ब्रा उसी की गवाही दे रही थी फिर दीदी ने अपनी सलवार उतारी अब मेरी दीदी मेरे सामने ब्रा पेंटी में खड़ी थी दीदी ने नेवी ब्लू कलर की पेंटी पेहेन रखी थी मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था अब दीदी अपने दोनों हाथ पीछे लेके गयी और अपनी ब्रा का हुक खोल दिया और अपनी ब्रा भी उतार दी दीदी के गोरे गोरे मुलायम मुलायम बोबे नंगे होगये थे कितनी सेक्सी लग रही थी मेरी दीदी आधी नंगी अपनी पेंटी में मेरे सामने खड़ी हुई दीदी के मोटे मोटे बोबे जिन पे बहुत छोटे छोटे ब्राउन कलर के निप्पल थे मेरे सामने थे मैंने देखा की दीदी के बोबे थोड़े लाल हो गए थे शायद मैंने बहुत ही ज्यादा मसल दिए थे फिर दीदी अपनी पेंटी उतारने लगी अब मुझे मेरे सवाल का जवाब मिलने वाला था की क्या
दीदी गरम थी
दीदी ने अपनी पेंटी उतारी और उसे उलटी करके देखने लगी मुझे समझ में आगया था की दीदी अपनी पेंटी पे लगे अपनी चूत के डिस्चार्ज को देख रही है दीदी की चूत बिलकुल चिकनी थी और दीदी की पेंटी में इतना डिस्चार्ज था की वो उनकी पूरी चूत पे लग गया था दीदी की चूत गीली होने के कारण चमक भी रही थी अब मुझे समझ में आ गया था की दीदी भी गरम थी बस में मैं जो भी कर रहा था उसमे उन्हें भी मजा आ रहा था मुझे मेरे सवाल का जवाब मिलते ही बहुत अच्छा सा लगने लगा दीदी ने अपनी ब्रा तो अपने सूट के नीचे डाल दी लेकिन पेंटी को उसी समय धोने लगी दीदी ने अपनी पेंटी धोके रखी फिर नहाने लगी दीदी ने धीरे धीरे नहाना चालू किया और मैंने धीरे धीरे वापस अपना लंड हिलाना चालू किया फिर दीदी ने मग्गे मैं पानी भरा और 2 – 3 बाद अपनी चूत के अंदर मारा और हाथ डाल के भी अपनी चूत को अंदर से साफ़ किया मैं दीदी को ऐसे ही नहाते हुए देखता रहा और अपना लंड हिलाने लगा थोड़ी ही देर में मेरा मुट निकल गया मैंने अपना लंड अंदर कियाऔर वापस छेद में से दीदी को नहाते हुए देखने लगा तभी पीछे से मम्मी की आवाज आई “सोनू !!! क्या कर रहा है तू …….
मुझे मेरे सवाल का जवाब मिलते ही बहुत अच्छा सा लगने लगा दीदी ने अपनी ब्रा तो अपने सूट के नीचे डाल दी लेकिन पेंटी को उसी समय धोने लगी दीदी ने अपनी पेंटी धोके रखी फिर नहाने लगी दीदी ने धीरे धीरे नहाना चालू किया और मैंने धीरे धीरे वापस अपना लंड हिलाना चालू किया फिर दीदी ने मग्गे मैं पानी भरा और 2 – 3 बाद अपनी चूत के अंदर मारा और हाथ डाल के भी अपनी चूत को अंदर से साफ़ किया मैं दीदी को ऐसे ही नहाते हुए देखता रहा और अपना लंड हिलाने लगा थोड़ी ही देर में मेरा मुट निकल गया मैंने अपना लंड अंदर कियाऔर वापस छेद में से दीदी को नहाते हुए देखने लगा तभी पीछे से मम्मी की आवाज आई “सोनू !!! क्या कर रहा है तू …..
अब आगे – मैं दीदी को नहाते हुए देख रहा था तभी मुझे मम्मी की आवाज आई “सोनू क्या कर रहा है तू ” मेरी तो डर के मारे हालत ख़राब हो गयी मैंने सोचा बेटा सोनू आज तो पकडे गए अब तो जूत पड़ेंगे मैंने डरते डरते पीछे मुड़ के देखा तो मम्मी दीदी के रूम के दरवाजे पे खड़ी थी और पर्दा हटा के मुझे देख रही थी मम्मी मेरे पीछे की तरफ खड़ी थी मम्मी ने अंदर आते हुए फिर पूछा “क्या कर रहा है तू यहाँ पे ” मेरे दिमाग में कुछ भी नहीं आ रहा था डर के मारे मेरी हालत खराब हो रही थी मैंने सोचा क्या बोलू पता नहीं मम्मी कब से खड़ी है यहाँ पे पता नहीं क्या क्या देख लिया मम्मी ने कहीं मम्मी ने मुझे बाथरूम में झांकते हुए और मुट मारते हुए तो नहीं देख लिया मैंने अपने आप को सँभालते हुए और अपने डर को छुपाते हुए मम्मी से कहा की “मम्मी दीदी ही अंदर से आवाज लगा रही थी आपको शायद कुछ कह रही है आपने सुना नहीं इसलिए मैं दरवाजे के पास खड़ा होके पूछ रहा था की क्या हुआ ” मम्मी ने बोला ठीक है तू जा मैं देखती हू ” ….


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