मोटे खड़े लंड की मालिश की मैंने

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Mote khade lund ki malish ki maine घर की डोर बेल कोई काफी देर से बजा रहा था मैं बाथरूम में कपड़े धो रही थी मैं जब बाहर आई तो मुझे लगा राजेश है लेकिन राजेश बाहर थे ही नहीं मैं जब दरवाजे की तरफ गई तो मैंने जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने राजेश के छोटे भाई मोहन थे। वह मुझे कहने लगे कि भाभी मैं काफी देर से डोर बेल बजा रहा हूं लेकिन कोई दरवाजा खोल ही नहीं रहा था मैंने मोहन से कहा राजेश पता नहीं कहां है। जब मैं बेडरूम की तरफ आई तो मैंने देखा राजेश लेटे हुए थे मैंने भी राजेश को डिस्टर्ब नहीं किया और मैं मोहन से कहने लगी कि मैं अभी कपड़े धो रही हूं थोड़ी देर बाद तुमसे बात करती हूं। मोहन कहने लगा कोई बात नहीं भाभी आप कपड़े धो लीजिए फिर वह हॉल में ही बैठे हुए थे जब मैं कपड़े धोकर बाहर आई तो मैंने देखा राजेश और मोहन आपस में बात कर रहे हैं। मैंने राजेश से कहा आप कितनी गहरी नींद में थे तो वह मुझे कहने लगे कि आज तो बड़ी मुश्किल से मुझे नींद आई थी इतने दिनों से तो मैं सो भी नहीं पा रहा हूं।

मैंने राजेश से कहा लेकिन आप को क्यों नींद नहीं आ रही है राजेश मुझे कहने लगे कि बस ऐसे ही। मोहन और राजेश आपस में बात कर रहे थे मैंने राजेश से कहा मैं आप दोनों के लिए चाय बना देती हूं तो राजेश मुझे कहने लगे ठीक है तुम हमारे लिए चाय बना दो। मैंने राजेश और मोहन के लिए चाय बना दी राजेश और मोहन के साथ मैं भी बैठ गई मोहन हमारे घर पर अब कम ही आया करते हैं मोहन की पत्नी शारदा का व्यवहार किसी के साथ भी ठीक नहीं रहता है इसलिए मोहन भी शारदा की वजह से अलग अलग ही रहते हैं। काफी दिन बाद मोहन घर पर आए थे तो मुझे भी अच्छा लग रहा था मोहन ने हमारे घर पर आना भी छोड़ दिया था लेकिन इतने दिनों बाद जब मोहन घर पर आए तो राजेश उनसे पूछने लगे मोहन तुम बहुत दिनों बाद घर आ रहे हो। वह कहने लगे कि हां भैया बस अपनी नौकरी की वजह से समय नहीं मिल पाता लेकिन शायद कारण वह नही था कुछ और ही बात थी इसलिए मोहन हमसे मिलने के लिए आए थे। जब मोहन ने राजेश से कहा कि शारदा कुछ दिनों से बीमार है तो राजेश कहने लगे कि शारदा को क्या हुआ मोहन ने बताया कि उसके पेट में कोई समस्या हो गई है जिस वजह से उसका ऑपरेशन करवाना है लेकिन उसके ऑपरेशन के लिए मेरे पास इतने पैसे नहीं है।

राजेश हमेशा से अपने परिवार को एक साथ रखना चाहते थे लेकिन शारदा की वजह से ही हम लोगों को अलग होना पड़ा। राजेश यह बात सुनकर थोड़ा घबरा गए थे और कहने लगे की मोहन तुम्हें कितने पैसों की आवश्यकता है मोहन कहने लगा भैया डॉक्टर ने तो कहा है कि पचास हजार तो कम से कम लगेंगे लेकिन मैं कहां से इतने पैसों का बंदोबस्त कर पाऊंगा। राजेश कहने लगे कि इतने पैसों का तो मैं भी बंदोबस्त नहीं कर पाऊंगा लेकिन फिर भी मैं कोशिश करता हूं कि कितने पैसे मैं तुम्हें दे सकता हूं। मोहन को इस बात का सुकून था कि कम से कम उसके भैया ने उसका साथ तो दिया और इस वक्त राजेश के अलावा मोहन का कोई भी साथ नहीं दे सकता था इसलिए राजेश से मिलने के लिए मोहन हमारे घर पर आए थे। मोहन काफी देर तक घर पर रहे और उसके बाद वह कहने लगे कि अब मैं चलता हूं मोहन अब जा चुके थे मैंने राजेश से कहा कि क्यों ना तुम शारदा को मिल आते। राजेश मुझे कहने लगे कि तुम भी मेरे साथ चलो हम लोग शारदा को देख आते हैं मैंने राजेश से कहा हम लोग शाम के वक्त शारदा से मिलने के लिए चलते हैं। राजेश और मैं इस बारे में बात कर रहे थे की आखिर कैसे शारदा की तबीयत खराब हो गई और जब हम लोग शारदा से मिलने के लिए गए तो शारदा की हालत वाकई में खराब थी वह अच्छे से बोल भी नहीं पा रही थी। मोहन कहने लगे कि भैया देखे ना शारदा कितनी बीमार है और अच्छे से वह बोल भी नहीं पा रही है राजेश ने मोहन को हिम्मत देते हुए कहा कि तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा तुम खुद पर भरोसा रखो और अपने हौसले को टूटने मत दो। राजेश और मैं आपस में ही बैठे हुए थे शारदा कुछ बोल तो नहीं पा रही थी लेकिन उसकी बेबसी मैं समझ पा रही थी। हालांकि शारदा ने भी कुछ ठीक नहीं किया था लेकिन उस वक्त उसे देख कर मुझे लग रहा था कि काश शारदा के साथ यह सब हुआ नहीं होता और वह जल्दी से ठीक हो जाए।

मेरे पास भी किसी बात का जवाब नहीं था थोड़ी देर बाद हम लोग अपने घर लौट चुके थे लेकिन मैं शारदा को देख कर बहुत ज्यादा परेशान थी। मैंने और राजेश ने इस बारे में बात की तो राजेश कहने लगे कि शारदा जल्दी ही ठीक हो जाएगी तुम चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा। राजेश ने भी पैसों का बंदोबस्त कर दिया था और थोड़े बहुत पैसे मोहन ने भी कर लिए थे अब वह शारदा का इलाज करवाना चाहते थे और शारदा के इलाज के लिए हम लोग उसे अस्पताल में ले गए। शारदा के भी परिवार से उसके भैया भाभी और उसके पापा मम्मी आए हुए थे शारदा का इलाज अच्छे से हुआ और अब वह पहले से अच्छा महसूस कर रही थी। धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होने लगा और जब शारदा ठीक हो गई तो उसके व्यवहार में भी बदलाव आ गया था। शरदा पहले की जैसी बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन उसकी तबीयत ठीक भी नहीं रहती थी वह ज्यादातर बीमार ही रहती थी मोहन इस बात से बहुत परेशान रहते थे। हमेशा ही वह यह बात कहते रहते थे कि शारदा पता नहीं कब ठीक होगी, अभी शारदा पूरी तरीके से ठीक भी कहां हो पाई थी।

शारदा भी पूरी तरीके से ठीक नहीं थी और वह घर पर ही रहती थी। मोहन उसकी बीमारी से परेशान रहने लगे थे और वह मुझे कहते कि भाभी जी शारदा तो बहुत ज्यादा बीमार रहने लगी है। मैंने मोहन से कहती आप चिंता मत कीजिए। मोहन के अंदर की परेशानी उसके चेहरे पर साफ दिखने लगी थी वह काफी दुबले पतले भी हो गए थे। शारदा की तबीयत खराब रहती थी तो मैं कभी कभार मोहन के घर खाना बनाने के लिए चली जाती। एक दिन मै खाना बनाने गई तो उस दिन मोहन ने मुझे कसकर पकड़ लिया और कहने लगे भाभी जी आज आपकी बड़ी गांड देखकर मैं अपने आपको रोक नहीं पा रहा हूं। मैंने मोहन से कहा आप तो ऐसे नहीं थे लेकिन आपको क्या हो गया है? वह कहने लगे भाभी जी आपको क्या बताऊं इतने दिनों से मैंने कुछ भी नहीं किया है आप ही मेरे लिए कुछ कीजिए। उन्होंने मेरी पतली कमर को पकड़कर मेरी गांड को अपने हाथों से दबाना शुरू किया मैं भी शायद उनकी बातों में आ गई मैंने कहा कि आप अपने लंड को बाहर निकालो मुझे देखना है आपका लंड कितना मोटा है। मोहन ने अपने लंड को बाहर निकाला हम दोनों रसोई में ही थे जिस प्रकार से मोहन के मोटे लंड को मैंने अपने मुंह के अंदर बाहर लेना शुरू किया तो वह बिल्कुल भी रह नही पा रहे थे। वह मुझे कहने लगे मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है काफी देर तक तो मैंने मोहन के लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर किया जब उनके लंड से पानी टपकने लगा तो वह मुझे कहने लगे भाभी जी आपकी चूत को मुझे चाटना है। मैंने उन्हें कहा क्यों नहीं और यह कहते ही मैंन उनके सामने अपने कपड़े उतारने शुरू किए वह मेरे बदन को देखकर मेरी तारीफ आए बिना रह ना सके। मेरा नंगा बदन मोहन के सामने था उन्होंने मेरी योनि को चाटना शुरू कर दिया मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था।

वह मेरी चूत को अच्छे से चाटे जा रहे थे उन्होंने काफी देर तक मेरी चूत का रसपान किया। मोहन ने मेरी चूत से पानी बाहर निकाल लिया मैंने उनसे कहा कि अब मुझसे रहा नहीं जाएगा। वह कहने लगे मैं आपकी चूत में लंड को घुसा देता हूं मैंने मोहन से कहां आप अपने लंड को मेरी योनि में घुसा दो। मोहन ने अपने लंड को मेरी चूत पर लगाया और अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया मोहन ने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया था। मेरे मुंह से बड़ी तेज चीख निकलने लगी मुझे बड़े अच्छे तरीके से सेक्स का मजा आने लगा मोहन मुझे बड़े ही अच्छे तरीके से सेक्स का मजा दे रहे थे। मैं अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर रही थी मैं अपने पैरों को चौड़ा करती तो मोहन भी आपनी पूरी ताकत के साथ अपने लंड को अंदर बाहर करते रहते जिससे कि मुझे भी मज़ा आ रहा था और मोहन को भी बड़ा आनंद आ रहा था।

काफी देर तक उन्होंने ऐसा ही किया जब मोहन मुझे कहने लगे कि भाभी जी अब मैं रह नहीं पाऊंगा तो मैंने उन्हें कहा आप अपने माल को मेरी योनि मे गिरा दो मोहन ने अपने वीर्य को मेरी योनि के अंदर ही गिरा दिया तो मैंने मोहन कहने लगे मुझे बहुत अच्छा लगा। जब मोहन ने अपने वीर्य को अंदर गिरा दिया तो मोहन के लंड से अब भी वीर्य भी टपक रहा था। मैंने मोहन के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया मोहन का लंड मैने खड़ा कर दिया था। खड़े हो चुके लंड पर मैंने तेल की मालिश की और मोहन से कहा कि मुझे काफी दिनों से अपनी गांड मरवानी थी लेकिन आज बड़ा अच्छा मौका है। वह कहने लगे आप तो बड़ी ही बेशरम है। मैने मोहन से कहा इसमें शर्म वाली क्या बात है मोहन ने भी मेरी चूतडो को पकडते हुए धीरे से मेरी गांड के अंदर अपने लंड को डालना शुरू किया तो मोहन का लंड मेरी गांड के अंदर जा चुका था और मुझे बहुत दर्द होने लगा था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मोहन मेरी गांड मार नहीं रहा बल्कि फाड रहा है क्योंकि मोहन का 10 इंच मोटा लंड मेरी गांड के अंदर तक जा रहा था और मोहन के अंडकोष मेरी गांड की दीवार से टकरा रहे थे। 5 मिनट के बाद जब मोहन ने अपने वीर्य से मेरी गांड के छेद को भर डाला तो मैंने उनसे कहा आज तो बड़ा मजा आ गया। मोहन कहने लगा आप मुझे हमेशा ऐसे ही खुश करते रहिएगा।


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