पहली चुदाई का नशा – २

आपने रूम मे आकर मैं पूरी तरह उसी के ख्यालों में डूबा रहा ,इस पहले टच को मैं आनंद माई महसूस कराता रहा ऐसा लग रहा था के मेरी उंगली अभी भी उसके नरम नज़्ज़ूक़ पावं से सटे हैं,और मेरा पूरा शरीर सिहर रहा था,अब मैं बेसब्री से कल होने का इंतेज़ार करने लगा ,दिल में तरह तरह के ख़याल   पैदा हो रहे थे मुझे उसे पाने के उपाय और नया प्लॅनिंग दिमघ तेज़ी से कर रहा था मैं उसे आकर्षित करने के तरीके सोच रहा था समय बहुत कम था और ऐसा मौका बार बार नही मिलता यह सोचकर भी मैं प्रेशन था इसी सोच विचार मे दिन ख़त्म हो गया और रात ना जाने कितने बजे पिंकी के ख़यालों मे कटी मुझे पता नही.

और फिर बड़ी मुश्किल से वो समय आ ही गया जिसके लिए मैं ब्यकुल था,मैं घंटे भर पहले से ही आपने आपको पूरी तरह से तैयार कर चक्का था आपनेहेयरस्टाइल को आज एक नये तरीके से सँवारा था सेविंग के बाद सुगंधित करीम भी लगा ली थी,और एक मदहोश कर देने वाली खुश्बू( जिसका मैं बहुत बड़ा शौकीन हूँ )आपने कपड़े पर च्चिड़क लिया और आपने मोबाइल में टाइम देखा जो शाम के 6 बजने का इशारा कर रहे थे ,और मैने ये समय चाय केलिए सही समझकर उस हुस्न पारी के दर्शन के लिए आपने रूम से निकल पड़ा निकल पड़ा

और पल मे ही उसके दरवाज़े पर फ़हुँच कर पर्दे के ट से आवाज़ दी पिंकी,,,और उधर से आवाज़ आई जी आती हूँ कदमों के आहत और पायल की झंकार मेरे कानो में मधुर रस घोल रहे थे ,के वैसे ही ज़रा सा परदा खिसका और वो सामने मुस्कुरा कर कह रही थी ,,जी आजाएँ ,,हुमलोग आपका ही इंतेरज़र कर रहे थे उसकी खनकती आवाज़ से मेरे दिल के तार झंझनने लगे और वो वापस मूडी मैं परदा उठा कर उसके पिच्चे चल पड़ा

अंदर रूम मे बेड के पास एक प्लास्टिक चेर पर उसने मुझे बैठने को कहा,मैं एक शरीफ बचे की तरह जाकर चेर पर बैठ गया और चारों तरफ नज़र घूमकर रूम का जेज़ा करने ,उस समय रूम मे वो और उसकी 13 साल की बहें थी और कोई ना था उसकी मा पड़ोस मे किसी काम से गयी थी ये उसने पूछने पर बताया,

फिर जल्द ही उसकी बहें प्लेट मे बिस्कट और ग्लास मे पानी लेकर आई ,और पिंकी ट्रे मे 2 कप चाय लेकर मेरे सामने मुस्कुरा रही थी, मैं सोच रहा था के कहाँ से बात की शुरुआत करूँ के उसने मेरी तरफ चाय की कप बढ़ते हुई बोल पड़ी के अगर मैं कल उसके पावं ठीक ना कराता तो वो आज बेड पर पड़ी होती ,मैने कहा हाँ मोच मे काफ़ी दर्द और तकलीफ़ होती है ,ओहिर उसने पूछा के आपने मोच ठीक करना कहाँ से सीखा मैने कहा गाव में हजम ये काम कराता था मैं ध्यान से देखा कराता था बस एक दोबार किसी आदमी पर आज़माया और मैं सफल रहा ,तो वो मुस्कुरा कर कहने लगी आप ,,आप और क्या क्या ठीक करना जानते हैं मैने कहा तुम मुझसे जो ठीक कार्वालो ,,,और हम दोनो हन्स पड़े और उसके पिच्चे उसकी बाहें भी मुस्कुरा रही थी,

और फिर थोड़ी इधर उधर की बात करके मैने आपना पहला जाल फेंका और कहा के वैसे तो मैं बहुतों के टाँग हाथ और कमर के मोच ठीक कर चुका हूँ मगर तुम्हारे पावं के जैसे नरम और नाज़ुक मैने आजतक किसी के नही देखे ,,,यह सुन कर वो शरम से लाल होने लगी और इधर उधर नज़रें चुराने की नाकाम कोशिश करने लगी, फिर मैने मैने कहा तुम घर के अंदर ही रहती हो कभी दिल बहाल करने को बाहर नही जाती हो? वो धीरे से बोली मैं मैं यहाँ की किचन क्वीन हूँ टाइम नही मिलता है अगर थोड़ा समय मिलता भी है तो मैं सूट सिलाई कराती हूँ मैं ने पूछा रोज़ किसकी सूट सिलाई कराती हो? तो उसने कहा ; मा एक लॅडीस टेलर के यहाँ से कटे हुए कपड़े लाकर देती है,,, मेरा हौसला बढ़ता जा रहा था क्योंकि मुझे आपनी कामयाबी की झलक उसकी आँखों में सॉफ दिख रही थी,

अगर पूरी डीटेल से बताउँगा तो शायद कहानी बहुत लंबी हो जाएगी इसलिए शॉर्ट कट में ये कहूँगा के इसके घर रूम में मेरा आना जाना बराबर होने लगा था और उस प्रिवॉर के सभी लोंगों से अब खुलकर बात चिट हँसी मज़ाक करने लगा था ,अगर एक दो दिन ना जाता तो उधर से ही बुलावा आ जाता,इसी तरह दिन काट रहा था सर्दी का मौसम शुरू होने लगा था ,

मैं अक्सर उसके घर घंटों बेड पर उसके फॅमिली के साथ बैठ कर लंबी लंबी डिंगें मराता और वो लोग मेरी बातों से इंप्रेस हो जाते ,सर्दी के मौसम में बेड पर एक रज़ाई से सारे लोग आमने सामने आपने पावं ढँक कर बैठ जाते और आपस में इधर उधर की बातें करते मैने इसी बात का लाभ उठाते हुए रज़ाई के अंदर ढेरे से आपना पावं पिंकी के पावं के तरफ ले गया और हिम्मत करके उसके उपर रख दिया वो चौंक कर मुझे घूर्ने लगी मैं ने हल्के हल्के सहलाना शुरू किया

वो बेचैन हो रही थी मगर कुच्छ कह नही पा रही थी क्योंकि हुमलोग सब साथ रज़ाई के अंदर पावं करके बैठे थे,और इधर उधर की बातें कर रहे थे मैं बातें भी कराता और साथ में रज़ाई के अंदर का कार्यकरम चालू रखता , फिर उसने पावं हटाकर विरोध भी नही किया जिससे मेरा हौसला बढ़ता गया

एक रात जब मैं वहाँ से आने लगा, वो भी पिच्चे पिच्चे आई और दरवाज़े पर लटके हुए पर्दे के ट मे रूम के बाहर आकर उसने पिच्चे से मेरे कमर में ज़ोर की चिकोटी ली ,मैं चमक कर ऊ किया पिच्चे मुड़कर देखा तो वो जीभ हिलाते हुए मुझे चिढ़कर भाग रही थी, मैं हैरान भी था और प्रेशन भी ,उसे जल्दी पाने की लालसा तेज़ होने लगी,और मैं भी रज़ाई के अंदर आपना हरकत तेज़ कर दिया मैं पावं से शुरू कराता और धीरे धीरे उसके जांघों तक सहला देता ,अब तो उसे भी मेरा सहलाना अच्छा लगता क्यॉंके वो अंजान बनी रहती ,और हम सब की बातें सुनती ,

मैं मच्छर का बहाना करके आपने हाथ कभी अंदर कर लेता और उसके जांघों और कमर पर फेराता ,जब मैं वहाँ से आने लगता तो वो दरवाज़े के बाहर तक मेरे पिच्चे आती,एक बार मैं हिम्मत करके मुड़ा और सबसे नज़रें बचाते हुए उसके हूतों का चुंबन ले लिया वो एक दम से लाज़कर भाग गई

सर्दी बहुत तेज़ हो रही थी अब मैं जब भी उनलोगों के साथ बेड पर बैठता तो हाथ रज़ाई के अंदर ही रखता और उसके कमर से नीचे की भाग को टच देने लगा था मगर चुत के पास सहलाने से उसके चेहरे पर अजब सी लाली आजाती,उसकी आँखें और नशीली हो जाती वो बहुत कुच्छ कहना चाहती मगर कुच्छ कह ना पाती

शायद उसके अंदर की जवानी भी वासना को एक दूं से तैयार थी,एक दिन दोपहर मे उसके घर गया तो वो अकेली थी मैने सही मौका समझकर उसे दबोचना चाहा उसने माना किया मगर मैने ज़बरदस्ती उसके हूतों को चूस लिया ,उसने ज़ोर लगाकर मुझसे अलग हुई और कहने लगी कोई देख लग तो,,,, मा अभी आती ही होगी आप आराम से बेड पर बैठो ना,,मैने कहा पिंकी मेरा दिल नही मानता है मैं रात रात भर तुम्हारे ख़यालों मे जागता हूँ प्ल्ज़ कब तुम मेरी बेचैनी दूर करोगी ?

शायद आग दोनो तरफ बराबर लगी थी क्योंकि उसने कहा मुझे भी नींद नही आती है रात भर आओके बड़े मे सोचती हूँ, मगर बदनामी का दर है कोई देख लेगा तो बवाल हो जाएगा.आप कोई रास्ता निकालो ना ,ऐसा रास्ता के जिसमे किसी चीज़ का दर नाहो,ये सुनकर मेरे शैठानी खोपड़ी ने झट से उपाय भी सोच लिए दूसरे दिन मैने नींद की गोली पिंकी को दिया और बता दिया के घर वालों के खाने या चाय में मिलकर देदेना और जब सब सो जाए तो बेधड़क मेरे कमरे मे आजना मैं दरवाज़ा खुला रखूँगा

मैं ये सोच सोच कर बहुत उत्तेजित हो रहा था की आज मारी मनोकामना पूरी होगी ,आज मैं वासना का नया खेल एक नयी चुत के साथ खेलूँगा ,कल्पना कर रहा चुदाई केन नये नये आसान का, बड़ी बेचैनी से रात काट रही थी उतावलापन बढ़ता जा रहा था,वासना की आग तेज़ होती जा रही थी के दरवाज़े पर उसकी आने की आहत हुई मैं हड़बड़ा कर उठा और दौड़ कर उसे दबोच लिया ,उसने कहा मेरे घरवाले जागेंगे तो नही ?,, मैने कहा डरो मत मेरी जान ऐसा कुछ नही होगा और जो होगा उसे आज तुम भी मस्त मगन हो जाओगी मेरी जान,और मैने आपना रूम का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया,

उसे पकड़कर मैं बेड की तरफ ले जाने लगा वो बोली लाइट ऑफ कार्दोनो ,मगर मैने माना कर दिया क्योंकि मैं उसके अंग अंग का दर्शन पूरी रोशनी मे करना चाहता था,फिर मैने उसे बेड पर लेता कर उसके कपड़े उतरे ,वो भी साथ देने लगी और अगले पल वो एक दूं से नंगी मेरे बेड पर मेरे सामने थी एक बार तो ऐसा लगा के कहीं ये सपना तो नही फिर मैने आपने गार्डेन झटके ओए हक़ीक़त की दुनिया मे आ गे एके ये सपना नही सच है,

अगले पल मैं भी नंगा था,वो मेरे तने हुए लॉड को घूर रही थी, मैं आयेज बढ़ा और उसके उपर झुक गया ,मैने उसके हूतों पर आपने होन्ट रख दिए

मैं उसके हूतों को दीवानावर चूस्ता रहा वो भी कसमसाती रही रह रहकर आपनी जीहब बाहर नकलती मैं उसके जीभ को आपने हूतों मे ज़ोर्से जकड़ता और तभी वो आपनी जीभ को अंदर कर लेती और उसके होन्ट में मेरे होन्ट चिपक जाते उसकी साँसें तेज़ हो रही थी दिलके धड़कन की आवाज़ बढ़ रही थी फ़िएर मैं नीचे की तरफ़ सरकने लगा उसके छ्होटे छ्होटे नितंबों   तक आकर रुक गया उसे एक तक निहारने लगा वो छ्होटे ना रंगी साइज़ के थे एकदम गोरी चुचि मगर बीच का रंग धीमा था और छ्होटी सी घुंडी मैने उसे मुँह मे लेकर चूसना शुरू किया वो कसमसाई और सिसकारी लेने लगी मुझे बहुत आनंद मिल रहा था,10 मिनिट तक मैं उसके मम्मे को चूस्ता रहा वो तड़प रही थी

मैने और नएचए सरकना शुरू किया उसके नाभी के पास आकर मैने आपनी ज़ुबान निकली और नाभी के गड्ढे मे ज़ुबान फेरने लगा अफ क्या दूधया बदन था जैसे चाँदी की चमक हो,मैं उसके अंग अंग से वासना का खेल खेल रहा था ,वो कसमसा रही थी तड़प रही थी,लेकिन मुझे कोई जल्दी नही थी मैं आराम से रास्पान कर रहा था

फिर मैं बेड से नीचे आगेया और उसके दोनो तंग पकड़कर आपनी तरफ खींच लिया वो टॅंगो को सिकोडकर आपनी चुत छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी ,मैने उसकी दोनो टाँगें घुटने से पकड़कर फैला दिए,अब उसका कुँवारा और छ्होटा सा चुत मेरे सामने था ,हालाँकि इंडियन चुत काली होती है मगर उसकी चुत एक दम घुलबी थे,छूट के किनारे का भाग उभरा हुआ था, और हल्के पन्ने दोनो तरफ से आकर चुत को कवर किए था ,झांट का नमोनशण तक ना था,एक दम चिकनी थी उसकी छूट,अनायास मेरे राल तपाक कर उसके चुत पर गिरे

और मैने ज़ुबान निकली उसके चुत के किनारे वाले भाग पर घूमने लगा मैने जान बूझकर और राल टपकाए और उसके छ्होटे से चुत को गीला और चिकना करने लगा थोड़ी देर बाद मैने आपनी उंगलिओन से उसके पन्ने हल्के से साइड किया तो उसके चुत वर्जिनिटी कुँवारा पं सॉफ झलक रहा था मैं आपनी जीभ लंबी कर उसके अंदर डाल दिया वो मेरे सर का बाल कसकर पकड़ ली और आपनी चुत की तरफ दबाने लगी

मैने ज़ुबान अंदर की और भर मुँह उसके चुत को हूतों से पकड़कर दबोच लिया और जी भर के चूसने लगा ,शायद उसके चुत से पानी रिसने लगा था ,क्योंकि मुझे आपने मुँह में थोड़ा नमकीन महसूस होने लगा था,काफ़ी डरटाक मैने ऐसा किया और वो उूउऊँ,आआहाआ,कराती रही,फिर मैं ने उसके चहहरे की तरफ एक निगाह की वो एकदम मस्त हो चली थी,उसके आँखें वासना की आग में ताप कर घुलबी हो रहे थे,मैं भी कंट्रोल के आख़िरी हद तक पहुँच गया था अब उद्घाटन का समय हो चला था मैने आपने लंड पर आपना हाथ फेरना शुरू कर दिया मैने उसे लंड चूसने को कहा वो माना करदी कहा मुझे घिन आती है,तो फिर मैने चुत द्वार पे आपना सोपड़ा टिकने लगा अभी हल्का सा अंदर की तरफ डाला था के वो आ करके बैठ गई ,बोली बहुत दर्द होता है आपका लंड मोटा है और मेरा छेड़ा छ्होटा,,उंगली अंदर बाहर करने को कहा उसने

मैं भी उसे आराम से चोदना चाहता था,इसलिए वापस उसके चुत में उंगली डाली,मगर ये क्या ,वो उंगली डालने पर भी कराह उठी बोली दर्द होता है ,मैं ने उसके चुत के किनारों को सहलाना शुरू किया ,वो फिरसे सिसकारी भरने लगी,मैने ने मुआका देखा और आप्नी उंगली थोड़ा अंदर तक डाला ,वो आ करके फिर उठ बैठी और रोने लगी,बोली बहुत दर्द हो रहा है ,मैने समझा कर उसे लेता दिया

वो लेती तो मैने देखा के उसके घुलबी चुत से लाल रंग के रस तपाक रहे थे , थोड़ी उंगली अंदर करने से खून बाहर आ गया मैने देर करना ठीक ना समझा और उसे बातों से बहलाने लगा और उसके आप्पर आ गया, वो माना कर रही थी ,बोली के कुच्छ हो ना जाए,उसने पहले कभी चुदाई नही की है,इसलिए अब वो दर रही थी और जाने के लिए कहने लगी मैने कहा कुच्छ नही होगा ,थोड़ा सा दर्द फिर बहुत मज़ा आएगा बड़ी मुश्किल से समझने पर वो तैयार हुई ,मैं ये मौका हाथ से गँवाना नही चाहता था, इसलिए उठा और अलमारी से बॉरोपलुस निकल कर आपने लंड के सोपडे पर और उसके चुत के द्वार पर लगा दिया ,फिर मैने आपना लंड पकड़कर उसके चुत पर रब किया वो सिहरने लगी मैं उसके चुत को आपने लंड से सहलाता रहा ,और मुका सही पाकर एक दम से मैने उसके चुत के अंदर धकेल दिया वो ज़ोर से चिल्ला उठी ओ,,माआ,मार गई, बस करो ,मैने जल्दी से उसके मुँह को दबाया और आपने धक्के तेज़ कर दिए वो तड़पने लगी मैं चोदता रहा,4 मिनिट तक ज़ोर के धक्के दिए और फिर चुत के अंदर ही झार गया, वो रोने लगी मैने आपने लंड बाहर निकाला जो उसके चुत के खून से लथपथ था,

मैने कपड़े से लंड सॉफ किया और उसे भी चुत पोच्छने का इशारा किया,वो ऐसे उठ रही थी जैसे महीनों की बीमार हो फिर उसने जल्दी से आपने कपड़े पहने और जाने को तैयार थी मगर थोड़ी भटक कर चल रही थी ,मैने आपने कमर में टवल लपेटा और दरवाज़े तक उसे छ्होर दिया और फिर मैं आपने बिस्तेर पर आकर निढाल हो गया,

महीनों गुज़र गये थे उसे फिर से चोदने की लालसा जाग रही थी मैं रोज़ उसके घर चाय के बहाने जाता और उसे मानता मगर वो राज़ी ना थी,फिर मैने उसे समझा बूझकर झाँसे में लिया और तैयार किया फिर दो टीन ही चुदाई में उसकी छ्होटी चुत का भोसरा ढीला हो गया,बाद मे तो वो मज़े लेलेकर चुद़वति और मैं भी उसे हर आंगल से चोदता.कई बार तो वो खुद चुवने केलिए ज़िद कराती ,और आपनी गान्ड उचका उचका कर मेरे लंड का मज़ा लेती…एक दिन उसकी मा ने हमें चुदाई करते पकड़ लिया ,और इसके बदले में मुझे उसकी मा की भी भोसरा फार चुदाई कैसे की ये अगली कहानी में बताउँगा

दोस्तों आप लोंगों को मेरी यह आपबीती कैसी लगी यह जान ने के लिए मैं आपलोंगों के जवाब का बे सबरी से इंतेज़ार करूँगा…….


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