सील तोड़ने का मजा

Seal todne ka maja:

kamukta, antarvasna मैं हमेशा की तरह अपने घर पर था मेरे पिताजी मुझे कहने लगे कि संतोष बेटा अब तुम कुछ कर क्यों नहीं लेते मुझसे जितना हो सकता था मैंने तुम्हारे लिए किया तुम्हें एक अच्छे कॉलेज में पढ़ाया और मुझे तुमसे बहुत उम्मीद है लेकिन तुम कुछ काम क्यों नहीं कर लेते। मैंने कुछ समय तक नौकरी की थी लेकिन मुझे लगा कि शायद नौकरी करने से मेरा भविष्य नहीं बदलने वाला इसीलिए मैंने अपना कोई स्टार्टअप खोलने की सोची लेकिन उसके लिए मेरे पास पैसे का अभाव था मैंने एक दो व्यक्तियों से पैसों की बात की थी और उन्हें मेरा प्रोजेक्ट बहुत पसंद आया था परंतु उन्होंने भी मुझसे कुछ समय मांगा था, मैं हमेशा ही एक बड़ा आदमी बनने का सपना देखा करता हूं लेकिन मेरे माता पिता चाहते कि मैं कुछ काम कर लूं ताकि मेरा भविष्य सुधर जाए परंतु मेरे सपने बड़े थे और मैं अपने सपनों को किसी भी सूरत में साकार करना ही चाहता था।

जिन व्यक्ति ने मेरा प्रोजेक्ट देखा था एक दिन उनका फोन मुझे आया और वह कहने लगे संतोष क्या तुम मुझसे मिलने के लिए आ सकते हो? मैंने उन्हें कहा जी सर मैं आपसे मिलने आ जाता हूं। वह पेशे से एक बिजनेसमैन है और उनका काफी बड़ा कारोबार है जब मैं उनसे मिलने उनके घर पर गया तो वह घर पर ही थे उनका घर काफी बड़ा है और उनके पास बहुत नौकर चाकर हैं मैं पहली बार ही उनके घर पर गया था इससे पहले मैं उन्हें ऑफिस में ही मिला था, मैं जब उनसे मिला तो वह मुझे कहने लगे संतोष बैठो, मैं सोफे पर बैठ गया और वह मुझसे पूछने लगे संतोष मुझे एक बात बताओ यदि मैं तुम्हें तुम्हारा काम शुरू करने के लिए पैसा देता हूं तो मुझे उससे क्या फायदा होगा? मैंने उनसे कहा सर यदि आप मुझे पैसे देते हैं तो उसमें से आदि हिस्सेदारी आपकी रहेगी बाकी मैंने आपको प्रोजेक्ट के बारे में पहले ही सब कुछ बता दिया था, वह मुझे कहने लगे प्रोजेक्ट तो मुझे बहुत पसंद आया और मैं तुम्हें पैसे भी देना चाहता हूं लेकिन पहले यह सब चीजें हम दोनों के बीच में क्लियर हो जाए ताकि आगे जाकर हम दोनों को कोई दिक्कत ना हो।

उन्हें मेरा प्रोजेक्ट काफी पसंद आया था इसलिए उन्होंने मुझे पैसे देने की बात की थी और कुछ दिनों बाद उन्होंने मुझे पैसे दे दिए, जब उन्होंने मुझे पैसे दिए तो मैं भी अपने काम पर लग गया सबसे पहले तो मैंने एक बड़ा सा ऑफिस लिया ताकि मुझे काम करने में कोई भी दिक्कत ना हो और वहां पर मैंने कुछ एंप्लॉय रख लिए, जिन व्यक्ति से मैंने पैसे लिए थे उनका नाम राजेंद्र है। मैं काम को लेकर इतना ज्यादा सीरियस था कि मैंने दिन रात एक कर दी घर पर भी मैं ज्यादा समय नहीं बिताता था मेरे मम्मी पापा मुझे कहते कि बेटा तुम तो अब कुछ ज्यादा ही बिजी हो गए हो, मैंने अपनी मम्मी से कहा कि मम्मी मुझे कुछ कर के दिखाना है इसीलिए मैं दिन रात इतनी मेहनत कर रहा हूं, मेरी मम्मी कहने लगी बेटा तुम अपना ध्यान तो रखो आजकल तो तुम खाना भी नहीं खाते हो और तुम घर पता नहीं कब आते हो और कब चले जाते हो हमें तो कुछ पता ही नहीं चलता, मैंने मम्मी से कहा मम्मी मैंने अब सोच लिया है कि मुझे अपने काम के प्रति ईमानदार रहना है मुझे अब किसी भी सूरत में अपने काम को पूरी तरीके से आगे बढ़ाना है तो मैं अब पीछे नहीं हट सकता,  मम्मी कहने लगी चलो आज तो तुम मेरे साथ कुछ देर बैठ जाओ हम लोग साथ में नाश्ता कर लेते हैं ना जाने कितना समय हो गया है एक साथ अच्छे से बात किए हुए। मैं अपनी मम्मी के साथ बैठ गया और नाश्ता करने लगा हम दोनों ने साथ में नाश्ता किया, मेरे पापा किसी काम से गए हुए थे पापा जब से अपने ऑफिस से रिटायर हुए हैं तब से वह ज्यादातर अपने दोस्तों के साथ ही रहते हैं कभी वह उनके साथ पार्क में घूमने चले जाते हैं और कभी उनके घर पर चले जाते हैं क्योंकि उन्हें भी घर पर रुकने की ज्यादा आदत नहीं है, मैं घर में इकलौता हूं जिस वजह से मेरी मम्मी मेरी बहुत चिंता करती है और वह चाहती है कि मैं अपना ध्यान रखूं।

हम दोनों ने उस दिन साथ में नाश्ता किया और मैं अपने ऑफिस चला गया मेरा काम भी अब अच्छे से चल पड़ा था और मैं राजेंद्र जी को समय पर सारी जानकारियां दे दिया करता राजेंद्र जी भी मेरे काम से बहुत ज्यादा खुश थे और वह कहने लगे संतोष तुम बहुत ही मेहनती हो तुम एक दिन मुझसे भी बड़े बिजनेसमैन बनोगे। राजेंद्र जी और मेरे बीच में अब अच्छी दोस्ती भी होने लगी थी क्योंकि हम दोनों साथ में काम कर रहे थे इसलिए उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा था धीरे धीरे मैं अपना मुकाम हासिल करने लगा और एक समय ऐसा आया जब मेरे पास काफी पैसा हो चुका था मैंने सोचा अब हम लोग इससे अच्छी कॉलोनी में घर ले लेते हैं और फिर मैंने एक अच्छी कॉलोनी में घर ले लिया, पहले हम लोग जिस कॉलोनी में रहते थे वहां पर भी सब कुछ अच्छा था लेकिन मैं चाहता था कि अब हम लोग दूसरी जगह रहे मम्मी पापा भी मेरे साथ आ गए कुछ दिनों तक तो उन्हें बहुत ही अजीब लगा क्योंकि उन्हें अपने पुराने घर की आदत थी लेकिन मैंने उन्हें कहा धीरे धीरे आपको यहां पर भी अच्छा लगने लगेगा और कुछ समय बाद वह लोग भी आसपास के लोगों से घुल मिल गए हमारे पड़ोस में भी काफी अच्छे लोग रहते हैं।

एक दिन मैं अपनी कार से ऑफिस के लिए जा रहा था तो मैंने देखा सामने से एक लड़की आ रही है उस लड़की की सूरत देख कर मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैं उसे बरसों से जानता हूं उसकी बड़ी बड़ी आंखें और उसके बड़े-बड़े बालों को देखकर मेरी नजर उससे एक पल के लिए भी नहीं हटी, मैंने अपनी गाड़ी को किनारे लगाया और गाड़ी से उतरकर मैं उसे देखता रहा मैंने जब देखा कि वह हमारे पड़ोस के घर में जा रही है तो मैं खुश हो गया लेकिन मैं अपने काम के प्रति कुछ ज्यादा ही सीरियस था इसलिए मैं ज्यादा समय घर पर नहीं दे पाता था परंतु मुझे वह लड़की इतनी पसंद आई कि मैंने उसके बारे में जानकारी निकलवाई तो मुझे पता चला कि वह हमारे पड़ोस में ही रहती है और कुछ दिनों के लिए ही वह आई हुई है उसका नाम साक्षी है। एक दिन एक साक्षी मुझे बस स्टॉप पर दिखाई दी मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हें छोड़ देता हूं लेकिन वह मुझे जानती नहीं थी और किसी भी अपरिचित के साथ बैठना शायद उसे ठीक नहीं लगा, मैंने उसे अपना परिचय दिया तो वह मेरे साथ बैठ गई जब वह मेरे साथ कार में बैठी तो मैंने उसे पूछा आप क्या करती हो तो वह कहने लगी मेरा कॉलेज अभी कुछ समय पहले पूरा हुआ है और अब मैं घर पर ही रहती हूं लेकिन मैं भी कुछ करना चाहती हूं। उसने मुझसे पूछा कि आप क्या करते हैं तो मैंने उसे अपने बारे में सब कुछ बता दिया वह मुझसे बहुत ज्यादा प्रभावित हुई वह कहने लगी आप बड़े ही मेहनती हैं। उसे जिस जगह जाना था मैंने उसे वहां पर ड्रॉप किया और वहां से मैं चला गया मैं जब अपने ऑफिस में बैठा था तो सिर्फ साक्षी के बारे में ही सोचता रहा और शाम को जब मैं घर लौटा तो मेरी मम्मी कहने लगी बेटा हम लोग कुछ दिनों के लिए गांव जा रहे हैं, मैंने मम्मी से कहा ठीक है आप लोग गांव हो आइए। अगले ही दिन मैंने उन्हें रेलवे स्टेशन छोड़ दिया और वह लोग वहां से गांव के लिए निकल पड़े, मैं वहां से उन्हें छोड़ते हुए अपने ऑफिस चला गया। एक दिन मुझे ऐसा लगा कि आज मुझे घर पर ही रहना चाहिए मैं उस दिन घर पर ही था मुझे दोपहर के वक्त बहुत भूख लगी तो मैंने सोचा कुछ बाहर से खाने के लिए ले आता हूं। मैं जब बाहर गया तो मैंने देखा साक्षी कहीं से आ रही है सक्षी मुझसे बात करने लगी मैंने जब उसे बताया कि मेरे मम्मी पापा गांव गए हुए हैं तो वह कहने लगी वह लोग कब गए। मैंने उसे कहा उन्हें काफी दिन हो गए हैं और मैं घर पर अकेला हूं।

मुझे खाना बनाना नहीं आता इसलिए मैं बाहर से कुछ लेने जा रहा हूं। साक्षी मुझे कहने लगी आपके लिए मैं कुछ बना देती हूं। मैंने उसे कहा यह तो मेरे ऊपर आपका बहुत ही बड़ा एहसान होगा। साक्षी कहने लगी इसमें एहसान की क्या बात है मैं बाहर से पनीर ले आया। साक्षी और मैं मेरे घर पर चले गए साक्षी ने मेरे लिए मटर पनीर बनाई तो मैंने जब वह मटर पनीर खाई तो मैं अपनी उंगलियों को चटाता रह गया। मैंने साक्षी से कहा तुम खाना बड़ा ही अच्छा बनाती हो साक्षी मुस्कुराने लगी। मैंने जब साक्षी का हाथ पकड़ा तो साक्षी मुझसे अपने हाथ को छुड़ाने लगी लेकिन मैंने उसके हाथ को अपने हाथों में पकड़े रखा और उसके होठों को किस किया। मैंने जब उसके होठों को किस किया तो वह भी उत्तेजित होकर मुझसे चिपकने लगी। मैंने उसके होठों को काफी देर तक चूसा मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। साक्षी को अब कोई आपत्ति नहीं थी मैंने जब उसके बड़े स्तनों पर हाथ लगाया तो वह तड़पने लगी और उसका शरीर पूरा गर्म हो गया। मेरा शरीर भी पूरा तपने लगा था मैंने जैसे ही अपने लंड को बाहर निकाला तो साक्षी ने उसे अपने हाथों में ले लिया।

पहले वह शर्मा रही थी लेकिन जब उसने अपने मुंह में लंड को लिया तो मुझे भी अच्छा महसूस होने लगा। मैंने जैसे ही अपने लंड को साक्षी की नई नवेली चूत में डाला तो उसकी चूत की सील टूट गई वह चिल्लाने लगी मैंने उसे चोदना जारी रखा। मैं काफी देर तक उसे चोदता रहा उसकी चूत का मैंने उस दिन बुरा हाल कर दिया था और उसे भी बहुत मजा आया। वह कहने लगी मुझे आज बहुत मजा आ गया मैंने साक्षी की सील उस दिन तोड़ी तो वह खुश हो गई। कुछ समय बाद वह अपने घर लौट गई लेकिन उसकी यादें मेरे दिल में अब भी हैं। मैं जब भी साक्षी को फोन करता तो वह हमेशा मुझे कहती कि मैं तुम्हें बहुत मिस करती हूं। मैंने उसे कहा मैं भी तुम्हें बहुत ज्यादा मिस करता हूं उसके बाद मैं अपने काम में बिजी हो गया और अपनी ही लाइफ में मैं इतना ज्यादा व्यस्त हूं कि मुझे अपने लिए भी समय नहीं मिल पाता।


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